मजदूर विरोधी सारे कानून को वापस लो


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 जनवादी लेखक संघ मेरठ

     सरकार द्वारा ले गए मनमाने और मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ, किसानों को एसपी देने और मनरेगा कानून को बहाल करने की मांगों को लेकर जनवादी लेखक संघ मेरठ द्वारा आज अखिल भारतीय मजदूर आंदोलन के समर्थन में राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले दिनों भारत सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताएं कानून के शासन और भारतीय संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ हैं तथा मजदूरों के बुनियादी अधिकारों पर जबरदस्त हमला है। सरकार द्वारा लाई गई ये चार श्रम संहिताऐं सिर्फ और सिर्फ देशी विदेशी बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए लाई गई है जिन्हें किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
    ये कानून सरकार की मनमानी कार्यवाहियां हैं जिन्हें मजदूरों को गुलाम बनाकर मालिकान के मुनाफे बढ़ाने के लिए लाया गया है। इन कानूनों को लाने से पहले सरकार ने भारत की केंद्रीय मजदूर यूनियनों के नेताओं और श्रम कानूनों के जानकारों से कोई सलाह मशविरा नहीं किया। हकीकत यह है कि भारत के अधिकांश पुराने श्रम कानून दुनिया के सबसे अच्छे कानूनों में शामिल हैं। उन कानूनों को हटाना सरकार की एकदम मनमानी और गुमराह करने वाली कार्यवाही है। 
    ये नए कानून मजदूरों की नई गुलामियों के नए दस्तावेज हैं। इन कानूनों के लागू होने के बाद देश में  ठेका प्रथा और अस्थाई करण की मुहिम शुरू हो जाएगी, मजदूरों का यूनियन बनाना मुश्किल हो जाएगा, हक मांगने वाले मजदूरों को मलिकान द्वारा नौकरी से निकाल दिया जाएगा, मजदूर विरोधी इन फॉर लेबर कोड्स को तुरंत रद्द किया जाए। यही मजदूर और देश हित में होगा। इसी के साथ-साथ किसानों को एमएसपी न देकर सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है तथा मनरेगा को मनमाने रूप से खत्म करना भारत के करोड़ों गरीबों और मजदूरों पर बड़ा हमला है।
     ज्ञापन में मांग की गई है कि ,,,,किसान, मजदूर और खेतिहर मजदूरों के खिलाफ लाए गए तमाम कानूनों को वापस किया जाएं,,,, मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए,,,, मजदूरों को प्रतिमाह 26000 न्यूनतम वेतन दिया जाए ,,,,ठेका प्रथा और निजीकरण की मुहिम को रद्द किया जाए ,,,,,अस्थाई, कच्चे कर्मियों और स्कीम मजदूरों को स्थाई किया जाए ,,,,,मनरेगा कानून को तुरंत बहाल किया जाए ,,,,न्यूनतम पेंशन ₹10000 प्रति माह लागू की जाए ,,,,,,सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण तुरंत बंद किया जाए ,,,,,पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए ,,,,,सभी मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा कानून लागू किए जाएं ,,,,, बिजली के निजीकरण की मुहिम को तुरंत बंद किया जाए ,,,, किसानों को फसलों का वाजिद दाम दिया जाए ,,,,समस्त भारतीयों को मुक्त शिक्षा, मुक्त इलाज और सबको रोजगार और सबको स्थाई नौकरी की नीतियां बनाकर लागू की जायं ,,,,,समस्त श्रम न्यायालयों में श्रम कानूनों के जानकार न्यायाधीश तुरंत नियुक्त किए जाएं ,,,,,,सभी श्रम कार्यालयों में मुकदमों के अनुपात में एएलसी, स्टेनो और कर्मचारी नियुक्त किए जाएं ,,,,भारत की तमाम महिला कर्मियों को समान काम का समान वेतन दिया जाए।
      ज्ञापन देने वालों में जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष मुनेश त्यागी, सहसचिव मंगल सिंह मंगल, कोषाध्यक्ष धर्मपाल सिंह मित्रा, असलम खान प्रथम, नाथी सिंह, रामचरण सिंह और धर्मवीर चंदेल आदि शामिल थे।

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