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बशीर बद्र चले गए हैं ज़माने को छोड़कर

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मुशायरों में अपनी ग़ज़ल सुनाने को छोड़कर, बशीर बद्र  चले गए  हैं  ज़माने  को  छोड़कर। ऐसा लगा कि छिन गया, घर का  कोई चराग़, वो  क्या  चले  गए  हैं  सिरहाने  को  छोड़कर। अब  कौन  दर्द  को  इतनी   नर्मी   से  कहेगा,   सारे  अल्फ़ाज़  रो  रहें  हैं  तराने को छोड़कर। महफ़िल  में  हर तरफ़ है, अंधेरों का धुंआ सा, जुगनू  क्या उड़ गए  हैं  ठिकाने  को  छोड़कर। उनकी  सदा  में   प्यार,  मोहब्बत,  वफ़ा  रही,   नफ़रत  को   दूर  रखा,  बहाने  को  छोड़कर। कितने  ही  टूटे  दिल  थे  जिन्हें  हौसला मिला,   वो  जा  चुके  हैं  दर्द  के  ख़ज़ाने को छोड़कर। सूनी  पड़ी हैं आज  ये  महफ़िल  की  कुर्सियाँ,   सब  लोग  उठ  गए   हैं  बह...

अलविदा बशीर बद्र

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जनवादी लेखक संघ (जलेस)_ लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में आम जन की जुबान पर मौज़ूद शायर बशीर बद्र (जन्म 15.02.1935) का 28 मई 2026 को इंतकाल हो गया। वे 91 वर्ष के थे। लंबे समय से वे उम्र से जुड़ी कई दिक्कतों से जूझ रहे थे। स्मृतिलोप (डिमेंशिया) नामक बीमारी ने उनकी याद रखने और खुद को पहचानने की ताकत ख़त्म कर दी थी। पिछले कुछ वर्षों में कई बार उनके न रहने की बात फ़ैली लेकिन हर बार अफवाह साबित हुई। ईद-उल-अजहा के दिन उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।       बशीर बद्र (असल नाम सैय्यद मुहम्मद बशीर) कानपुर में पैदा हुए थे हालांकि उनका परिवार फ़ैज़ाबाद जिले का बाशिंदा था। दर्ज़ा तीन तक कानपुर के एक स्कूल में पढ़ाई करने के बाद पुलिस में मुलाज़िम अब्बाजान सैय्यद मुहम्मद नज़ीर के तबादले के कारण परिवार इटावा आ गया। यहाँ से उन्होंने हाईस्कूल पास किया। वालिद का इंतकाल हो जाने के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़कर पुलिस महकमे में नौकरी कर ली। जब परिस्थितियाँ अनुकूल हुईं तो उन्होंने नौकरी छोड़कर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उर्दू में एम. ए. और पीएच. डी. किया...

कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार के मंत्री एवम विधायकों पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत*  पीलीभीत। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के आवाहन पर शहर के होटल में जिला शहर कांग्रेस ने प्रेस वार्ता आयोजित की प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों और विधायकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं कांग्रेस पार्टी लगातार जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठती रही है और आंदोलनरत है आगे भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी लड़ाई जारी रखी जाएगी आज की प्रेस वार्ता में संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता हेमंत मिश्रा ने कहा की महोबा की दलित छात्रा का अपहरण कर 16 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया उसके साथ न सिर्फ दुष्कर्म किया गया बल्कि नरभक्षीय व्यवहार किया गया सरकार का कोई मंत्री पीड़िता के घर नहीं पहुंचा कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पीड़िता का दुख साझा करने उनके घर जा रहे थे तो उन्हें रोकने की हर संभव कोशिश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई लेकिन फिर भी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पीड़िता के घर उसका दुख बांटने पहुंचे संवेदनहीन सरकार जो खुद तो पीड़िता का दुख साझा करने पीड़ित के घर नहीं पहुंची अजय राय जी के जाने से इतना व्याकुल हो गई कि पूरे प्रदेश में सरकार की सह पर भाजप...

डिजिटल मूल्यांकन पर उठे सवाल

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रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी  “ऑन-स्क्रीन मार्किंग” की गड़बड़ियों ने छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर खड़े किए गंभीर प्रश्न तकनीक से पारदर्शिता लाने का दावा, लेकिन स्कैनिंग त्रुटियों, पुनर्मूल्यांकन और जवाबदेही के संकट ने शिक्षा-न्याय पर गहरी बहस छेड़ी डिजिटल मूल्यांकन का सपना और विद्यार्थियों की पीड़ा तकनीक, जवाबदेही और शिक्षा-न्याय के बीच खड़ा एक गंभीर प्रश्न भारत की शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षा परिणामों से नहीं, बल्कि उस भरोसे से पहचानी जाती है जो वह अपने विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में पैदा करती है। परीक्षा किसी छात्र के लिए महज़ अंक प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं होती; वह उसके वर्षों के परिश्रम, परिवार की उम्मीदों और भविष्य के सपनों का आधार होती है। ऐसे में यदि मूल्यांकन प्रणाली में गंभीर त्रुटियाँ सामने आती हैं, तो उसका प्रभाव केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इसी संदर्भ में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा बारहवीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के “ऑन-स्क्रीन...

मैं आधा हिंदू हूं,मैं आधा मुसलमान हूं कोई माने ना माने,मैं पूरा हिंदुस्तान हूं

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मुनेश त्यागी मैं आधा हिंदू हूं,आधा मुसलमान हूं,  कोई माने ना माने,मैं पूरा हिंदुस्तान हूं।  मैं पाखंडों से लड़ता हुआ, जहर देकर मारा जाता हुआ  दयानंद सरस्वती हूं,  मैं मैदान-ए-जंग में लड़कर  मरता हुआ टीपू सुल्तान हूं,  मैं नाना हूं, तात्या टोपे हूं,  मैं मंगल पांडे हूं,  मैं नाना साहब का मुख्य सेनापति  अजीमुल्ला खान हूं,  मैं महारानी लक्ष्मीबाई और  बेगम हजरत महल हूं, मैं झांसी की रानी के तोपखाने का  मुखिया खुदा बख्श और गौस खान हूं, मैं मादरेवतन की खातिर  अपने दोनों पुत्रों को न्यौछावर करने  वाला शहंशाह बहादुर शाह जफर हूं।  मैं काकोरी कांड का मुखिया  राम प्रसाद बिस्मिल हूं,  मैं काकोरी का सजायेमौत  पाने वाला अशफाक उल्ला खान हूं। मैं आधा हिंदू हूं,मैं आधा मुसलमान हूं,  कोई माने ना माने,मैं पूरा हिंदुस्तान हूं। मैं दंगों की भेंट चढ़ा  गणेश शंकर विद्यार्थी हूं,  मैं फांसी के फंदे को चूमता  हुआ राजगुरु, सुखदेव और  शहीद ए आजम भगत सिंह हूं,  मैं अल्फ्रेड पार्क में ...

साजिशी अभियान के निशाने पर वकील

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मुनेश त्यागी       आजकल सोशल मीडिया, अखबारों और कई जजों के निशाने पर वकालत का पेशा और वकील छाए हुए हैं। वकीलों को बदनाम करने का एक निरंतर अभियान जारी है। पिछले दिनों यह मुद्दा तब सामने आया जब सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कुछ वकीलों को "परजीवी" और "कॉकरोच" बता दिया। अभी दो दिन पहले बार काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष का बयान आया है कि वकालत के पेशे में 30 से 40% फर्जी वकील हैं।  पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के लखनऊ में वकीलों के सैकड़ों चैंबर्स ढा दिए गए। यह साजिश तब अपने शिखर पर पहुंच गई जब पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत, एक बहुत ही अहम मुद्दे पर, मेरठ के डीएसपी ने बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों और महामंत्रियों के डेलिगेशन से, मिलने से मना कर दिया।     यहां पर सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है की आखिर वकालत के गरिमा में पैसे को जान पहुंचकर एक साजिश के तहत क्यों बदनाम किया जा रहा है? वकीलों को बदनाम करने के पीछे ज्यूडिशरी और बार काउंसिल का अध्यक्ष क्यों पड़ गया है और अब वकीलों और इस गरिमामय पेशे को क्यों निशाने पर लिया जा रहा है? वकील अपने गरि...

सांप्रदायिक ताकतें बन गई हैं वैश्विक लुटेरे साम्राज्यवाद की सबसे बड़ी रक्षा कवच

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मुनेश त्यागी      आज पूरी दुनिया में देखा जा रहा है कि दुनिया की अधिकांश सांप्रदायिक ताकतों ने, देश और दुनिया की अधिकांश पूंजीवादी, जातिवादी और साम्राज्यवादी ताकतों से गठजोड़ कर लिया है। वे उनके साथ मिलकर काम कर रही हैं और अधिकांश देशों की सत्ता और सरकार पर काबिज हो गई हैं।        इसी के साथ-साथ यह जानना भी बहुत जरूरी है कि आखिर वे कौन सी जनविरोधी, अमानवीय और असंवेदनशील ताकतें हैं जो इन सांप्रदायिक ताकतों का नेतृत्व कर रही हैं, इनकी बडे पैमाने पर आर्थिक मदद कर रही है और सांप्रदायिक आतंकवादी हमलों को धरती पर उतारने की नीतियां तैयार कर रही हैं। सांप्रदायिक ताकतों और साम्राज्यवादी ताकतों के गठजोड़ द्वारा भारत में किये जा रहे इन कारनामों को जानने और समझने के लिए यह जरूरी है कि भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 में हिंदू और मुस्लिम एकता का बहुत बड़ा योगदान रहा था। इस स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी उपलब्धि और विरासत हिंदू और मुस्लिम एकता थी। अंग्रेज इससे पूरी तरह से डर गए थे और वे किसी भी तरीके से, इस हिंदू मुस्लिम एकता को तोड़ना चाहते थे। इ...