सबका साथ–सबका विकास” का दावा सवालों के घेरे में, बिजली योजनाओं का बड़ा हिस्सा वीआईपी जिलों में खर्च
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
सांसद नीरज मौर्य के लोकसभा प्रश्न से खुलासा-आरडीएसएस योजना के 30% फंड पांच चुनिंदा जिलों में, बाकी 70 जिलों को शेष राशि
बरेली/आंवला।
केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार जहां “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, वहीं बिजली विभाग की योजनाओं के आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं। आंवला-बरेली से समाजवादी पार्टी के सांसद Neeraj Maurya द्वारा लोकसभा में ग्रामीण बिजली वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने और जर्जर विद्युत तारों को बदलने से जुड़ी Revamped Distribution Sector Scheme (आरडीएसएस) योजना को लेकर पूछे गए प्रश्न से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
लोकसभा में प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में आरडीएसएस योजना के तहत कुल 21,204 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत यानी 6,314 करोड़ रुपये की राशि पहले से ही संतृप्त माने जा रहे पांच चुनिंदा जिलों — Varanasi, Kanpur, Noida, Lucknow और Prayagraj — में खर्च कर दी गई।
वहीं प्रदेश के शेष 70 सामान्य जिलों, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर बिजली तारों और कमजोर वितरण व्यवस्था की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, उन्हें बाकी 70 प्रतिशत यानी 14,890 करोड़ रुपये में समेट दिया गया है।
सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि सरकार का विकास संतुलित नहीं है। एक ओर भाजपा सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकतर बजट चुनिंदा वीआईपी जिलों तक ही सीमित दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बिजली के जर्जर तार, बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और कमजोर वितरण व्यवस्था बड़ी समस्या बनी हुई है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि योजनाओं का लाभ समान रूप से सभी जिलों तक पहुंचे, ताकि ग्रामीण जनता को भी बेहतर बिजली व्यवस्था मिल सके।
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