पिछड़े जिलों में केंद्रीय संस्थानों की चुप्पी: सांसद मौर्य का सवाल, सरकार बस योजनाओं के आंकड़े देती है ।
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
पिछड़े जिलों में नए केंद्रीय संस्थानों पर चुप्पी - सांसद नीरज मौर्य
उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान और पिछड़े जिलों में नए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार के पास कोई स्पष्ट और प्रत्यक्ष योजना नहीं है। शिक्षा मंत्रालय के उत्तर में यह बताया गया कि राज्य में पहले से 15 केंद्रीय वित्त पोषित संस्थान मौजूद हैं और प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत विभिन्न कॉलेजों को सुदृढ़ करने के लिए भी धनराशि दी जा रही है।
सांसद नीरज मौर्य ने सरकार से पूछा था कि शैक्षणिक पिछड़े क्षेत्रों में नए केंद्रीय संस्थान या कौशल आधारित कॉलेज स्थापित करने की क्या योजना है। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल अवसंरचना, प्रयोगशालाओं के विकास, कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले पाठ्यक्रमों और ग्रामीण छात्रों के लिए शिक्षा ऋण की समस्याओं पर भी विस्तृत जानकारी मांगी थी। मंत्री के उत्तर में विभिन्न परियोजनाओं का उल्लेख किया गया, नये संस्थानों की स्थापना पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि यदि पिछड़े और कृषि आधारित क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो क्षेत्रीय असमानता और बढ़ेगी। उन्होंने मांग की कि सरकार केवल योजनाओं के आंकड़े प्रस्तुत करने के बजाय इन क्षेत्रों में नए केंद्रीय संस्थानों की स्थापना के लिए ठोस नीति बनाए
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