आंगनवाड़ी केंद्रों पर ई-पॉस मशीन लगाने की कोई योजना नहीं: सांसद नीरज मौर्य
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
पोषण वितरण में पारदर्शिता और अनियमितताओं पर रोक के लिए ठोस नीति का अभाव, लोकसभा में सवाल के जवाब में हुआ खुलासा
नई दिल्ली/बरेली। आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषक आहार के वितरण में पारदर्शिता लाने और संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए ई-पॉस मशीनों तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लागू करने की फिलहाल केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से सांसद नीरज मौर्य को दिए गए लिखित उत्तर में सामने आई है।
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में प्रश्न पूछकर आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण सामग्री वितरण में हो रही गड़बड़ियों और अनियमितताओं को रोकने के लिए ई-पॉस मशीनों के माध्यम से वितरण और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य किए जाने की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर सहित राज्य के अन्य जिलों में आंगनवाड़ी केंद्रों पर ई-पॉस मशीनों की स्थापना और इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता के बारे में भी सरकार से जवाब तलब किया था।
इसके साथ ही सांसद ने यह भी पूछा था कि जिन क्षेत्रों में सर्वर या इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या रहती है, वहां पोषक आहार के वितरण को प्रभावित होने से बचाने के लिए ऑफलाइन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि फिलहाल आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण वितरण को ई-पॉस मशीनों और बायोमेट्रिक प्रणाली से जोड़ने की कोई प्रस्तावित योजना सरकार के पास नहीं है।
इस पर सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि जब देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित कई सरकारी योजनाओं में डिजिटल तकनीक के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, तब आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण सामग्री के वितरण को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी निगरानी प्रणाली लागू नहीं की गई तो पोषण योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों तक सामग्री की सही और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस नीति बनाने की भी मांग की है।
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