रमज़ान के रोज़े: इबादत के साथ सेहत का भी बड़ा जरिया-डॉ. अनीस बेग


रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी

मैक्सा लाइफ हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. अनीस बेग ने बताया, मेडिकल साइंस भी रोज़ों को मानती है फायदेमंद

बरेली। रमज़ान का मुबारक महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और इंसानियत का पैगाम लेकर आता है। इस महीने में रखे जाने वाले रोज़ों को इस्लाम में फर्ज़ किया गया है। लेकिन अब मेडिकल साइंस भी यह मानने लगी है कि रोज़े इंसान के शरीर के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं।
इस संबंध में मैक्सा लाइफ हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. अनीस बेग ने बताया कि रमज़ान में रोज़ा रखने से शरीर को नेचुरल तरीके से डिटॉक्स होने का मौका मिलता है। दिन भर खाने-पीने से परहेज़ करने के कारण पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर में जमा कई हानिकारक तत्व बाहर निकलने लगते हैं।
डॉ. अनीस बेग के अनुसार रमज़ान के पहले दस दिनों में शरीर रोज़े की प्रक्रिया के साथ खुद को ढालना शुरू करता है। शुरुआती दिनों में शरीर लीवर और मांसपेशियों में जमा ग्लूकोज़ और ग्लाइकोजन का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए करता है। कुछ दिनों बाद शरीर जमा फैट को ऊर्जा में बदलना शुरू कर देता है, जिससे अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है और शरीर हल्का महसूस करता है।
उन्होंने बताया कि दसवें रोज़े के बाद शरीर रोज़े का पूरी तरह आदी हो जाता है और इसके बाद रोज़ों के स्वास्थ्य लाभ और अधिक स्पष्ट होने लगते हैं। इस दौरान शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया तेज़ होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
डॉ. बेग का कहना है कि मेडिकल रिसर्च के अनुसार नियमित फास्टिंग से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रहता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। इसके अलावा रोज़े रखने से मोटापा, पाचन संबंधी समस्याएं और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि रमज़ान के रोज़े केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद अहम हैं। इस्लाम ने करीब 1400 साल पहले रोज़ों को फर्ज़ करके इंसान को अनुशासन, संयम और स्वास्थ्य के महत्व का संदेश दिया था, जिसे आज की मेडिकल साइंस भी सही ठहरा रही है।
डॉ. अनीस बेग ने रोज़ा रखने वालों को सलाह दी कि सेहरी और इफ्तार में संतुलित और पौष्टिक भोजन लें, ज्यादा तला-भुना खाने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, ताकि रोज़े के दौरान शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहे।
 डॉ, अनीस बेग ने कहा रमज़ान के रोज़े केवल रूहानी सुकून और इबादत का जरिया ही नहीं हैं, बल्कि यह इंसान के शरीर को स्वस्थ रखने का भी एक बेहतरीन तरीका हैं। यही वजह है कि आज मेडिकल साइंस भी रोज़ों को सेहत के लिए लाभकारी मानती है।

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