बरेली शहर सीट पर सपा के ‘एजुकेशन आइकन’ मोहम्मद कलीमुद्दीन की दमदार दावेदारी, हजारों छात्रों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाकर बनाई मजबूत पहचान



ओमेगा क्लासेस के डायरेक्टर कलीमुद्दीन शिक्षा, समाजसेवा और युवाओं की ताकत के सहारे 124 शहर विधानसभा में बन सकते हैं सपा का बड़ा चेहरा

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

बरेली की 124 शहर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव और ओमेगा क्लासेस के डायरेक्टर मोहम्मद कलीमुद्दीन की दावेदारी तेजी से मजबूत होती नजर आ रही है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों और समाजसेवा के कार्यों ने उन्हें शहर की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बना दिया है।

 शिक्षा के क्षेत्र में ‘सफलता का ब्रांड’ बने कलीमुद्दीन
साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद वर्ष 2012 में राजेंद्र नगर, बरेली में स्थापित ओमेगा क्लासेस आज पूरे बरेली मंडल में सफलता का पर्याय बन चुका है। यहां से अब तक हजारों छात्र डॉक्टर और इंजीनियर बन चुके हैं। अगर  124 शहर विधानसभा की बात की जाए तो 8 हजार से अधिक हिंदू परिवारों के बच्चे और 10 हजार के करीब मुस्लिम परिवारों के बच्चों को कलीमुद्दीन पढ़ा चुके है
100 से ज्यादा गरीब बच्चों को मुफ्त कोचिंग देकर डॉक्टर बना चुके है
कलीमुद्दीन का स्पष्ट कहना है कि “टैलेंट पैसे का मोहताज नहीं होना चाहिए”- और इसी सोच के साथ वे निर्धन छात्रों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराते हैं।

 जमींदार परिवार और मजबूत राजनीतिक विरासत

मोहम्मद कलीमुद्दीन का संबंध बरेली जनपद के नवाबगंज तहसील के ग्राम टहा प्यारी नवादा के एक प्रतिष्ठित जमींदार परिवार से है, जिसकी पहचान रोहिलखंड में खलील ख़ान के नाम से रही है।
इस परिवार के संबंध आज़ादी के बाद से ही कांग्रेस के दिग्गज नेताओं जैसे: पंडित
 गोविंद बल्लभ पंत,
नारायण दत्त तिवारी,
कुंवर जितेंद्र प्रसाद
बाबा साहब,श्रीपति 
मिश्रा से जुड़े रहे हैं, जिससे परिवार की राजनीतिक पकड़ और मजबूत रही है।

 समाजसेवा में भी निभाई अग्रणी भूमिका

मोहम्मद कलीमुद्दीन केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय समाजसेवी भी हैं।
2020 लॉकडाउन के दौरान राशन और दवाइयों का वितरण
मलिन बस्तियों से लेकर पॉश इलाकों तक जरूरतमंदों की 
मदद,पिछले 4 वर्षों में 50 गरीब बेटियों की 
शादी करना, इन कार्यों ने उन्हें जनता के बीच ख़ास पहचान दिलाई है।

युवाओं की ताकत और राजनीति में मजबूत कदम

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपना रोल मॉडल मानने वाले कलीमुद्दीन ने 2022 चुनाव से पहले बड़ा मतदाता जागरूकता अभियान चलाया।
लगभग 10 हजार नए वोटर बनवाने में अहम 
भूमिका, युवाओं की मजबूत टीम तैयार, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है

चुनावी समीकरण में क्यों मजबूत हैं कलीमुद्दीन?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बरेली 
शहर विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी संख्या का होना,
शिक्षा के माध्यम से सभी वर्गों में गहरी 
पहुंच,युवा वर्ग में मजबूत पकड़
साफ-सुथरी और समाजसेवी छवि
इन सभी कारणों से कलीमुद्दीन इस सीट पर सपा के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकते हैं।
 
क्या सपा खेलेगी ‘एजुकेशन कार्ड’?

विश्लेषकों का मानना है कि अगर समाजवादी पार्टी मोहम्मद कलीमुद्दीन पर दांव लगाती है, तो बरेली शहर सीट पर चुनावी परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां और समाज के हर वर्ग में उनकी पहुंच उन्हें एक मजबूत और स्वीकार्य उम्मीदवार बनाती है।
मोहम्मद कलीमुद्दीन की पहचान अब केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे शिक्षा, समाजसेवा और युवा शक्ति के संगम के रूप में उभरकर बरेली की राजनीति में एक मजबूत दावेदार बन चुके हैं।

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