"नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद और डॉक्टर मोहम्मद फ़ाज़िल की मीटिंग से गरमाए राजनीतिक समीकरण"

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

रोहिलखंड की राजनीति में किंग मेकर बनते डॉक्टर मोहम्मद फ़ाज़िल, सांसद चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल।

बरेली, आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने आज बरेली पहुंचकर समाजसेवी और आला हज़रत सर्जिकल एंड ट्रॉमा सेंटर के डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद फ़ाज़िल से मुलाक़ात की।
करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चली इस मुलाक़ात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का तूफ़ान खड़ा कर दिया है।

बताया जा रहा है कि मुलाक़ात बेहद गंभीर और गोपनीय माहौल में हुई, जिसमें आने वाले विधानसभा चुनाव और राजनीतिक समीकरणों पर गहन चर्चा हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ़ औपचारिक मुलाक़ात नहीं थी, बल्कि इसके पीछे आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति छुपी हुई है।
डॉ. मोहम्मद फ़ाज़िल कोई आम शख़्सियत नहीं हैं।
वो लंबे समय से समाजसेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और खासतौर पर मंसूरी समाज को संगठित करने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है।
2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन पार्टी के अंदरूनी खींचतान और पुराने नेताओं की राजनीति ने उनके रास्ते में रोड़े अटका दिए।

लेकिन चुनाव के बाद डॉ. फ़ाज़िल पीछे नहीं हटे।
बल्कि उन्होंने बरेली मंडल के 25 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर संगठन और समाज को मजबूत करना शुरू कर दिया।
उनकी साफ़ छवि, बढ़ती सक्रियता और जनसेवा के कार्यों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया है।

यही कारण है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी भी बरेली में उनसे मुलाक़ात कर चुके हैं। उस मुलाक़ात के बाद भी राजनीतिक चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया था।
और अब चंद्रशेखर आज़ाद का उनसे मिलना, विपक्ष की राजनीति को नई दिशा देता हुआ नज़र आ रहा है।

राजनीतिक सूत्रों की मानें तो बसपा और कांग्रेस भी डॉ. फ़ाज़िल को अपने साथ जोड़ने की कोशिशें लंबे समय से कर रही हैं।
और अब आज़ाद समाज पार्टी की एंट्री ने यह साफ़ कर दिया है कि डॉ. फ़ाज़िल रोहिलखंड की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

सपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर हमारे संवाददाता से कहा—
"अगर डॉ. मोहम्मद फ़ाज़िल का सपा से मोहभंग हो गया और उन्होंने किसी अन्य दल का दामन थाम लिया, तो न सिर्फ बरेली बल्कि पूरे मंडल में सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।"

दरअसल, डॉ. फ़ाज़िल का प्रभाव केवल मंसूरी समाज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी पकड़ हर तबके में मज़बूत होती जा रही है।
ऐसे में यह मुलाक़ात 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है।

क्या चंद्रशेखर आज़ाद और डॉ. फ़ाज़िल की ये मुलाक़ात आने वाले चुनावी गठजोड़ की भूमिका है?
क्या रोहिलखंड की राजनीति में नया मोर्चा बनने जा रहा है?
और सबसे अहम—क्या डॉ. फ़ाज़िल का सपा से मोहभंग होना अखिलेश यादव के लिए बरेली मंडल में सियासी झटका साबित होगा?

फिलहाल, इस बंद कमरे की मीटिंग के बाद रोहिलखंड की राजनीति में नए समीकरण बनने की सुगबुगाहट तेज़ हो चुकी है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में डॉक्टर फ़ाज़िल का अगला क़दम क्या होता है?

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