पीलीभीत 51 वॉ उर्स अनवरी बडी शानो शौकत के साथ शुरू हुआ खानकाह चिश्तिया साबरिया का संदेश , इल्म का चिराग जलाये, मोहब्बत पैदा करे*

शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत* 

51 वॉ उर्स अनवरी के मौके पर खानकाह चिश्तिया साबरिया का शहर वासियो के लिए एक संदेश है कि, इल्म का चिराग जलाये, मोहब्बत पैदा करे, अपने घर के बच्चों को अच्छी से अच्छी आधुनिक शिक्षा दे। जहां शिक्षा होती है वहा जहालत नही होती, और जहां जहालत होगी, वहां पर शिक्षा के चिराग से उस अन्धेरे को दूर किया जा सकता है। नफरतों को मिटाऐ, हम सब मानव, एक ईश्वर की सन्तान है। सूफी सय्यद अनवर अली शाह साहब की रवानकाह से दोनों ईल्म समाज को दिये जा रहे है। यहा दीन व दुनियाँ दोनों सँवारे जाते है। दरगाह की ओर से निर्धन, विकलांग, यतामों, बेवाओ के छात्र/छात्राओं को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। मदरसा जामऐ अनवर के छात्र पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन कर रहे है। आधुनिक शिक्षा से बुद्धि का विकास, स्वयं का विकास, राष्ट्र का विकास निर्भर करता है।

हमारे पूर्वजों ने दोनों शिक्षाओं को ग्रहण करने की पैरवी करी है, धार्मिक शिक्षा से स्वर्ग मिलेगा। जब तक मानव शरीर में आत्मा है, तो उसको दुनिया में रहकर, दुनिया की हर चीज ग्रहण करने की आवश्यकता होती है। तो उसके लिए जरूरी है कि मॉडर्न शिक्षा प्राप्त करें। राष्ट्रीय शिक्षा से अच्छा जीवन यापन, समाज को मज़बूती, नया भारत निर्माण में मुख्य भूमिका अदा कर सकते है।

दरगाह का मिशन है कि एक हाथ में कुरान हो, तो दूसरे हाथ में कम्प्यूटर हो। हाफिज़े कुरान के पास दोनों शिक्षाओं का ज्ञान होना अनिवार्य है।

4 दिवसीय उर्स में दरगाह कैम्पस में कोई भी माईक से कार्यक्रम, रिकार्डिंग, तेज आवाज, ध्वनि प्रदूषण नही फैलाया जाता है। सड़को पर माईक नही लगाते, हमारे पड़ोसियों को पता भी नही चलता कि दरगाह के कैम्पस में उर्स हो रहा है। दरगाह का सारा फोकस शिक्षा पर है, न कि माईक कि रिकार्डिंग पर।

ग‌द्दीनशीं डा० बिलाल हसन चिश्ती साबरी का कहना है कि एक बनो और नेक बनो।

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