चुनाव मे प्रत्याशीगण जिस उत्साह से चुनाव अभियान चलाते हैं और निर्वाचित होने पर क्षेत्र के विकास का ध्यान क्यों नहीं रखते -इफ्तिखार महमूद

 चुनाव मे प्रत्याशीगण जिस उत्साह से चुनाव अभियान चलाते हैं और निर्वाचित होने पर क्षेत्र के विकास का आश्वासन और भरोसा देते हैं- वह चुनाव बाद दिखलाई नहीं पड़ता है।राज्य के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए एक वर्ष होने को है, लेकिन गोमिया के विकास में कोई गुणात्मक परिवर्तन होता हुआ दिखलाई नहीं पड रहा है। बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधा का भी अभाव पूर्व की भांति यथावत है। जल मीनार की सुविधा वाले गांव में भी जल आपूर्ति चुनाव संपन्न होने के एक साल बाद भी नियमित नहीं हो पाया है। आश्चर्य की बात है कि ग्रामीण इलाका के गरीब बिजली उपभोक्ताओं से, चुनाव खत्म होते ही, बिजली बिल की वसूली शुरू कर दिया गया, 200 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा अघोषित रूप से समाप्त कर दी गई और बिजली बिल की राशि पुर्व से करीब दो गुना ज्यादा लिया जाने लगा। परिणामस्वरुप जनता चुनाव संपन्न होने के एक साल के अंदर ही निराशा हो गई। 
       गोमिया विधानसभा क्षेत्र में मात्र शिलान्यास, उद्घाटन तथा ट्रांसफार्मर के लिए फीता काटने का जो पूर्व से परंपरा चली आ रही है।उसी को विधायक/सांसद क्षेत्र का विकास समझते हैं। गोमियां क्षेत्र में पलायन बहुत बड़ी समस्या बन गयी है, रोजगार के अभाव तथा न्यूनतम दर से मजदूरी नहीं मिलने के कारण बहुत बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर जाकर काम कर रहे हैं, किंतु प्रवासी कामगारों की सुरक्षा का अभाव को विधायक मुद्दा नहीं बनाते हैं। ये अपने दायित्व को प्रवासी मजदूरों के दाह संस्कार के लिए मिलने वाली सरकारी अनुदान के भुगतान तक सीमित रखते है। गोमियां विधानसभा क्षेत्र में ही ग्राम अभियंत्रण संगठन, ग्रामीण विकास विभाग, पेयजल स्वच्छता विभाग, लोक निर्माण विभाग इत्यादि के द्वारा भवन, सड़क, पुल के निर्माण में नियोजित मजदूर सामान्यतः गरीबी रेखा के नीचे के लोग होते हैं। फिर भी उन्हें अढ़ाई से तिन सौ रुपया प्रतिदिन पर काम लिया जाता है, जो न्यूनतम मजदूरी दर से डेढ़ - दो सौ रुपया कम है। खेद है कि किसी भी विधायक ने उपर्युक्त गरीबी रेखा के नीचे के लोगों के आय में वृद्धि के लिए न्यूनतम दर से मजदूर को अपना एजेंडा कभी नहीं बनाये। विधायक मद से होने वाले काम में भी न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन होता है, और इस पर श्रम विभाग भी संज्ञान नहीं ले पाती है।
  पिछले एक वर्ष का परिदृश्य सरकारी योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन तक सीमित रहा है। विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में एक- इफ्तिखार महमूद इलाके की आवश्यकताओं का समाधान के लिए सक्रिय नजर आते हैं। बिजली आपूर्ति निगम पर लगाम कसने का काम श्री महमूद ने हीं किया, फलस्वरुप उपभोक्ताओं को पुण मुफ्त बिजली मिलने लगा, तेरह साल बाद सियारी पंचायत के बिरहोरडेरा में बिजली पहुंच पाया, डेढ़ सालों से बंद जागेश्वर बिहार का स्वचालित जलापूर्ति योजना पुण: चालू  हुआ। 
 सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सरकारी एजेंसियों द्वारा संपन्न होता है। इन योजनाओं का मात्र शिलान्यास या उद्घाटन से क्षेत्र का गुणात्मक विकास नहीं होना है। क्षेत्र का गुणात्मक विकास के लिए क्षेत्र केआवश्यकता के अनुरूप एजेंडा निर्धारित करना होता है जिसका गोमियां में सर्वथा अभाव है।

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