बिहार विधानसभा चुनाव में खाता खोलने की बसपा की नई रणनीति
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
यूपी सीमा से सटे जिलों में जुटेगी पूरी ताक़त, पूर्वांचल के नेताओं को मिली ज़िम्मेदारी
लखनऊ/पटना।
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने का मन बना लिया है। पार्टी का लक्ष्य इस बार बिहार में अपना खाता खोलना है। इसी रणनीति के तहत बसपा ने उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे जिलों पर खास फोकस किया है।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती की रणनीति के अनुसार, गाज़ीपुर, बलिया, चंदौली, कुशीनगर, देवरिया और सोनभद्र जैसे पूर्वांचली जिलों के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को बिहार में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया है। इन जिलों का भूगोल और सामाजिक समीकरण बिहार से जुड़ा हुआ है, इसलिए संगठन को उम्मीद है कि यहां से प्रभावी समर्थन हासिल किया जा सकता है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बसपा ने बिहार में गोपालगंज, कैमूर, चम्पारण, सिवान और बक्सर जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। ये जिले उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं और यहां बसपा का परंपरागत जनाधार भी मौजूद है।
बसपा के बिहार प्रदेश पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने ज़िलों में दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और वंचित वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने के अभियान में पूरी सक्रियता दिखाएं। साथ ही, यूपी के संगठनों से भी लगातार तालमेल बनाए रखें ताकि सीमावर्ती इलाकों में पार्टी का जनाधार और मज़बूत हो सके।
सूत्रों के मुताबिक बसपा इस बार करीब 15 विधानसभा सीटों पर पूरी ताक़त से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। पार्टी का मुख्य फोकस दलित समाज को एकजुट कर कुछ सीटों पर सफलता दर्ज करने का है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा की यह रणनीति सीमावर्ती जिलों में सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। यदि पार्टी अपने परंपरागत मतदाताओं को सक्रिय करने में सफल होती है, तो बिहार की कुछ सीटों पर बसपा की उपस्थिति चुनावी समीकरण बदल सकती है।
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