25 दिसंबर महराजा सूरजमल बलिदान दिवस के रूप में मनाया,


आज किसान यूनियन अराजनैतिक सरधना कार्यालय पर अमित चौधरी छबड़िया के  नेतृत्व मे   25 दिसंबर महराजा सूरजमल बलिदान दिवस के रूप में मनाया,भरतपुर राज्य के प्रसिद्ध जाट शासक थे। वे सिनसिनवार गोत्र के जाट थे और अपने समय के सबसे कुशल, दूरदर्शी एवं वीर योद्धा माने जाते हैं। समकालीन इतिहासकारों ने उन्हें "जाटों का प्लेटो" और आधुनिक लेखकों ने "जाट यूलिसिस" की उपाधि दी, क्योंकि उनकी राजनीतिक बुद्धिमत्ता, स्थिर बुद्धि और स्पष्ट दृष्टि अद्भुत थी।जन्म और प्रारंभिक जीवनमहाराजा सूरजमल का
जन्म 13 फरवरी 1707 को भरतपुर में हुआ था। उनके पिता राजा बदन सिंह (जो भरतपुर के संस्थापक माने जाते हैं) और माता रानी देवकी थीं। बदन सिंह ने मुगल शासन के कमजोर पड़ने पर जाट राज्य की नींव मजबूत की, और सूरजमल ने युवावस्था से ही राज्य संभाला। 1755 में पिता की मृत्यु के बाद वे औपचारिक रूप से भरतपुर के महाराजा बने, लेकिन उससे पहले ही वे राज्य के प्रमुख निर्णय लेते थे।राज्य विस्तार और विजयेंसूरजमल ने छोटे से राज्य को एक शक्तिशाली साम्राज्य में बदल दिया। उनके शासन में भरतपुर राज्य में आगरा, मथुरा, अलीगढ़, धौलपुर, मेरठ, गुरुग्राम, रोहतक, रेवाड़ी आदि क्षेत्र शामिल हो गए। उन्होंने जीवनकाल में कई युद्ध लड़े (कुछ स्रोतों के अनुसार 80 युद्ध, सभी में विजय) और मुगलों, मराठों, रोहिल्लों एवं अफगानों को पराजित किया।मुख्य घटनाएँ:1733 में भरतपुर शहर की स्थापना और लोहागढ़ किला का निर्माण (जो कभी नहीं जीता गया, ब्रिटिशों ने भी 13 बार असफल प्रयास किए)।
1761 में आगरा किले पर कब्जा।
जयपुर के उत्तराधिकार युद्ध में ईश्वरी सिंह का समर्थन कर विजय दिलाई।
दिल्ली पर दो बार आक्रमण (1753 और बाद में)।
पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) के बाद मराठों की पराजय में उन्होंने तटस्थ रहकर अपनी शक्ति संरक्षित की, लेकिन मराठा महिलाओं-बच्चों को शरण दी,


: हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर, सभी जाति-धर्म के लोगों को योग्यता के आधार पर पद दिए।
किसानों का सम्मान करते थे और कृषि सुधार किए।
शाकाहारी और श्रीकृष्ण भक्त थे।
उत्तर भारत को विदेशी आक्रमणों (अब्दाली आदि) से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मृत्यु25 दिसंबर 1763 को हिंदोन नदी के पास रोहिल्ला सरदार नजीब-उद-दौला की सेना द्वारा घात लगाकर उनकी हत्या कर दी गई। उस समय उनकी आयु मात्र 56 योद्धा और कुशल शासक के रूप में अमर हैं।

बंटी छबड़िया, उदेश तालियन , टिकंदर  छबड़िया, श्रीपाल ,जॉनी त्यागी, अंबुज त्यागी,जगमाल पाल,राजन, अंकित चौधरी,मनोज तालियान,अतुल त्यागी,डॉ इदरीश,शारूख,सचिन त्यागी,शिवन कलंद,कालू कलंद , राजेंद्र कुमार,अंकित त्यागी,अंकित कुमार ,निशु,हर्ष सिद्धू,आदि

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