ख्वाजा गरीब नवाज का उर्स बड़ी धूम धाम से मनाया गया सूफी अनवर अली साहब की खानकाह में गरीब नवाज की टोपी के दीदार हुए
शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत*
पीलीभीत मोहल्ला भूरे खां स्थित प्रसिद्ध सूफी अनवर अली शाह साहब की खानकाह में हजरत ख्याजा गरीब नवाज का उर्स बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। इस मौके पर सूफी संत हकीम सैयद मोहम्मद अनवर अली शाह साहब की खानकाह में जायरीन का हुजूम उमड़ा, जहां लोगों ने ख्वाजा साहब की पवित्र टोपी के दीदार किए।
मानवता का संदेश देते हैं ,सुफी डॉ.
बिलाल खानकाह के गद्दीनशीं है lडॉ. बिलाल हसन चिश्ती साबरी ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूफीवाद केवल इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता और प्रेम का मार्ग है। उन्होंने कहा, सूफी दिलों को जोड़ता है, तोड़ता नहीं, यह समाज में पुल बनाने और अमन कायम करने की बात करता है। डॉ. बिलाल ने व्याजा साहब की सादगी का जिक्र करते हुए बताया कि कम बोलना, कम खाना और कम सोना एक सच्चे सूफी की पहचान है। गरीबों के मददगार थे ख्वाजा साहब
डॉ. बिलाल ने बताया कि ख्वाजा साहब की दयालुता और गरीबों के प्रति उनके समर्पण के कारण ही उन्हें गरीब नवाज कहा जाता है। उन्होंने जात-पात से ऊपर उठकर मानवता का पाठ पढ़ाया, यही कारण है कि आज पूरी दुनिया में चिश्ती सिलसिले के अनुयायी सबसे अधिक है। ख्वाजा साहब के उर्स के विशेष अवसर पर खानकाह में ख्वाजा साहब की टोपी के दीदार भी कराये l
दरगाह आज भी सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।
पवित्र टोपी के हुए दीदार, देश के लिए मांगी दुआ उर्स के विशेष अवसर पर खानकाह में संरक्षित ख्वाजा साहब की टोपी को दर्शन (दीदार) के लिए निकाला गया, जिसे देख जायरीन भावुक हो उठे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. बिलाल हसन ने मुल्क में अमन, चीन और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए विशेष दुआ मांगी। कार्यक्रम के समापन पर तबर्दुक के रूप में दलिया वितरित किया गया।
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