भारतीयों को हिंदू-सनातन के नाम मुस्लिम सिक्ख ईसाई का डर दिखाकर ठगा जा रहा है-गादरे*


 दिल्ली:-90% भारतीयों को 3% के षडयंत्रकारीयों द्वारा इंडियंस को धार्मिक उन्माद वैमनष्यता फैलाकर खुल्लम खुल्ला लूटा और ठगा जा रहा है।
राजुद्दीन गादरे राष्ट्रीय प्रवक्ता बहुजन मुक्ति पार्टी ने देश की लगातार गिरती जीडीपी बढती बेरोजगारी महंगाई अत्याचार भ्रष्टाचार और हिंसक धार्मिक स्थलों पर हमले वैमनस्यता पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र के नाम पर समाज को गुमराह करके एक बड़े वर्ग को नुकसान पहुंचाया जा रहा है? राष्ट्रवाद की भावनाओं में बहाकर समाज को गुमराह किया जा रहा है ।
एक बड़े वर्ग ओबीसी को गैर बराबरी और असमानता की खाई में धकेल कर राष्ट्रवाद की बातें करना सरासर बेईमानी है।
 समाज के बड़े वर्ग को गैर बराबरी और असमानता में बनाए रखकर राष्ट्रवाद का निर्माण संभव नहीं है।
 हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र जैसे शब्दों का  इस्तेमाल राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है 
जबकि हकीकत यह है कि ना तो हिंदुत्व कोई धार्मिक शब्द है और ना ही हिंदू राष्ट्र, समाज के पिछड़े दलित व उपेक्षित वर्गों को उनके हक अधिकार दिलाने की बात करता है।
 हिंदुत्व का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि हिंदुत्व कोई धार्मिक शब्द न होकर बल्कि यह एक राजनीतिक पंथ है, जो अपने हक अधिकार और बराबरी की बात करने वालों को रोकता है, उनका विरोध करता है और उन्हें देशद्रोही और गद्दार तक बताता है।
 तो जो हिंदुत्व, गैर बराबरी को बनाए रखना चाहता है वह धर्म कैसे  हो सकता है, वह निश्चय ही राजनीतिक पंथ है  
और इसकी जडें  वी डी सावरकर और बंकिम चंद्र चटर्जी के
द्वारा लिखे गए ग्रंथो में छिपी हुई हैं 
बंकिम चंद्र चटर्जी के ग्रंथ आनंद मठ में आपको यह जानकारी मिल जाएगी कि यदि भविष्य में कभी भारत हिंदू राष्ट्र बना तो उसे हिंदू राष्ट्र में पिछड़े दलित व अल्पसंख्यक समुदाय के क्या हक अधिकार होंगे और उसका स्वरूप क्या होगा।
आपको यह स्पष्ट पता चल जाएगा हिंदू राष्ट्र में पिछड़े व दलित वर्ग को कोई हक अधिकार निर्धारित नहीं है, मनु वादियों द्वारा प्रायोजित यह हिंदू राष्ट्र हिंदू धर्म ग्रंथो में वर्णित, वर्ण व्यवस्था पर आधारित राष्ट्र होगा। 
 जो संविधान से नहीं, धर्म ग्रंथो मैं वर्णित व्यवस्था के आधार पर  संचालित होगा।
 धर्म ग्रंथो में पिछड़े व दलित को जो गैर बराबरी की बातें कही गई हैं उन्हें शिक्षा संपत्ति आदि के कोई हक अधिकार न देकर उनसे सिर्फ सेवा कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं, वही सारी व्यवस्थाएं हिंदू राष्ट्र निर्माण होने के बाद लागू की जाएंगीं। 
तो हमें हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र के झांसे में आने की जरूरत
 नहीं ।
हिंदुत्व हिंदू धर्म तथा हिंदू राष्ट्र का विश्लेषण करने की जरूरत है कि हिंदुत्व क्या है, हिंदुत्व की हकीकत क्या है, हिंदू धर्म का स्वरूप क्या है,
 क्या हिंदू धर्म में पिछड़े व दलित वर्ग की वही हक अधिकार और मान सम्मान है,जो सवर्ण समाज के हैं।
हिंदू शब्द का मतलब क्या होता है?
हिंदू शब्द की उत्पत्ति कब हुई ?
यह किस भाषा का शब्द है तथा मनुवादी ब्राह्मण इस शब्द को कब से अपना रहे हैं?
हिंदू शब्द को अपनाने की उन्होंने आवश्यकता कब महसूस की? आखिरकार वह इस हिंदू शब्द को स्वीकार करने के लिए मजबूर कब हुए ?
 जिस हिंदू शब्द से उन्हें और उनके महापुरुष दयानंद सरस्वती को नफरत थी, जिसने 1875 मे अपने संगठन का गठन करते समय अपने संगठन का नाम ,हिंदू समाज न रखकर आर्य समाज रखा, और  हिंदू शब्द के पीछे उसकी जो सोच थी उसका वर्णन उसने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में भी किया है।
*हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों, पहले राष्ट्र और देश में फर्क तो समझो। भारत एक गणतंत्रात्मक देश है, राष्ट्रों का समूह। एक राष्ट्र तब बनता है जब एक भाषा, एक संस्कृति, एक धर्म,  एक रहन सहन, एक खाना पीना इत्यादि हो। इसे राष्ट्र कहने की गलती ना करें। इस देश में लोकतंत्र के साथ-साथ संवैधानिक रूप से एक गणतंत्र है, जिसमें लोगों के नामांकन और नियुक्ति के माध्यम से शासन की प्रणाली चलती है। इसके अलावा भारत में जनता के द्वारा निर्वाचित नेताओं के द्वारा संचालित स्थानीय तंत्र भी है। अब मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि भारत कभी भी हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता।*
 तो हमें यह समझना है कि आखिरकार यह हिंदू शब्द का इतिहास क्या है?
 धर्म आधारित जो हिंदू राष्ट्र  बनाने की बातें कही जा रही हैं उस हिंदू राष्ट्र में पिछड़े व दलित समुदाय को क्या हक अधिकार  मिलेंगे। 
क्या देश के सभी वर्गो को एक समान अधिकार होंगे
 क्या उनके तथा कथित हिंदू राष्ट्र में ,समाज के सभी वर्गों को, समान अधिकार होंगे?
 इनके हिंदू राष्ट्र की संकल्पना और उनके उद्देश्य की जानकारी,
हासिल करने के लिए आपको  हिंदू राष्ट्र की अवधारणा प्रस्तुत करने वाले ब्राह्मण दार्शनिक वी डी सावरकर और बंकिम चंद्र चटर्जी के लेख पढ़ने चाहिए, उनकी रचनाएं समझनी चाहिए।
तब आपको सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र के सहारे ,समाज के एक बड़े वर्ग की राष्ट्रीय भावनाओं को उभार कर,  पिछड़े दलित आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदाय को उनके हक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और हम लोग इनके द्वारा प्रयोग किए गए हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र जैसे शब्दों विचलित और भ्रमित होकर, इनकी साजिशों को
  समझ ही नहीं पा रहे हैं। कुल मिलाकर हमें यह समझना है कि
सत्ता में बैठी ब्राह्मणवादी सोच के सरकार द्वारा राष्ट्रवाद की बातें करके , हमारी धार्मिक भावनाओं को भड़काकर, हमें राष्ट्रवाद की भावना में बहाकर, हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके इनकी आड़ में हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र की आड़ में पिछड़ों को उनके हक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
हिंदू राष्ट्र की संरचना क्या होगी, इस विषय पर ओबीसी एससी समाज को समझाने के लिए हिंदू धर्म के मौजूदा स्वरूप के आधार पर लोगों को समझायें, कि हिंदू धर्म ग्रंथों के आधार ओबीसी तथा एससी एसटी के क्या हक अधिकार हैं, धर्म ग्रंथो में उनके लिए क्या हक अधिकार और कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं, उनके साथ कैसा व्यवहार करने को कहा गया है ।
और वास्तविक जीवन में उनके साथ कैसा व्यवहार हो रहा है।
 इसी आधार पर  भविष्य  में निर्माण होने वाले हिंदू राष्ट्र का 
क्या स्वरूप होगा वह समझने के प्रयास करें ।
साथ ही साथ हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना के प्रस्तावक वी डी सावरकर और बंकिम चंद्र चटर्जी के दार्शनिक विचार भी प्रस्तुत करें।

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