नगीना की बढ़ती जनसंख्या व आगे को बढ़ने वाली जनसंख्या को देखते हुए प्लेटफार्म नंबर एक से दो पर जाने के लिए 12 मीटर चौड़ा पुल हो गया तैयार।
नगीना की बढ़ती जनसंख्या व आगे को बढ़ने वाली जनसंख्या को देखते हुए प्लेटफार्म नंबर एक से दो पर जाने के लिए 12 मीटर चौड़ा पुल हो गया तैयार।
नगीना - सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगीना के रेलवे स्टेशन का निर्माण अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1885 में हुआ था। जब नगीना की जनसंख्या भी बहुत कम थी। आज नगीना की जनसंख्या लगभग एक लाख से भी पार होने जा रही है। भाजपा की केन्द्र सरकार के नेतृत्व में नगीना रेलवे स्टेशन का भी अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत भाग जागे और वर्ष 2022-2023 से नगीना नव निर्माण रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू हुआ। वर्ष 2025 से निर्माण कार्य में तेज़ी शुरू हुई प्लेटफार्म नंबर एक पर भवनों का निर्माण व प्लेटफार्म नंबर एक व दो के प्लेटफार्म भी ऊचें हो गए प्लेटफार्म नंबर एक से प्लेटफार्म नंबर दो पर यात्रियों के जाने के लिए लगभग 12 मीटर चौड़ा पुल का निर्माण किया गया जिस पर कार्य बहुत तेज़ी से चल रहा है। प्लेटफार्म नंबर एक पर अंग्रेजों के जमाने का बना पुराना भवन भी बहुत जल्द ध्वस्त कर दिया जाएगा। नगीना रेलवे स्टेशन पर बन रहें 12 मीटर चौड़े पुल का निर्माण भारतीय रेल ने आगे को बढ़ने वाली जनसंख्या को देखते हुए कराया है। नगीना वैसे तो पहले से ही चाय, समोसे, रसगुल्ले व काष्ट कला उधोग से भी दुनिया के कोन कोन में जाना जाता रहा है। लेकिन अब नगीना में बन रहे खुबसूरत रेलवे स्टेशन से भी नगीना की पहचान और ताज़ा हो जाएगी।
नगीना लोकसभा व विधानसभा, काष्ट कला उद्योग की नगरी कहलाने व एडीजे न्यायालय, होने के बाद भी नगीना रेलवे स्टेशन से लगभग 10 एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों की आवाजाही अप साइड व 10 एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों की पुराने समय से चली आ रही है। पीछले वर्षों कोरोना वायरस की फैली बीमारी को देखते हुए। भारतीय रेल ने अंग्रेजों के जमाने से चल रही गरीब मजदूरो, बेसहारा, मध्य वर्ग के लोगों की लखनऊ से सहारनपुर चलने वाली ट्रेन को बंद कर दिया गया था। देश से कोरोना महामारी जैसी बीमारी को खत्म हुए लगभग तीन चार वर्ष होने के बाद भी बंद पड़ी लखनऊ से सहारनपुर की ओर चलने वाली ट्रेन को आज तक नहीं चला पाए हैं। लखनऊ साहनपुर ट्रेन के बंद होने से लखनऊ साहनपुर तक पड़ने वाले छोट बड़े दर्जनों रेलवे स्टेशन के गरीब, मजदूर, बेसहारा, व मध्यवर्ग के यात्री यात्रा से वंचित होकर रह गए। लेकिन लखनऊ से सहारनपुर तक पड़ने वाली विधानसभा व लोकसभा क्षेत्र के पूर्व व वर्तमान सांसद व विधायक व मंत्री बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेन को यात्रियों की सुविधा के लिए चलवाने में नाकाम दिखाई दिए।
नगीना के पूर्व भाजपा सांसद यशवंत सिंह, बसपा के गिरीशचंद्र भी अपने अपने 5-5 वर्ष के कार्यकालों को पूरा करके क्षेत्र की जनता को विकास व सुविधा दिलाने का ख्वाब दिखाकर चले गए। लेकिन वो भी नगीना की जनता को नगीना रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली नाॅन स्टोप ट्रेनों में सेकिसी भी एक ट्रेन का स्टोपिज नहीं करा पाए और न ही लखनऊ साहनपुर पैसेंजर ट्रेन को चलवा पाए हैं। नगर के वरिष्ठ भाजपा नेता व व्यापारियों ने नगीना रेलवे स्टेशन पर नाॅन स्टोप ट्रेनों में एक दो ट्रेनों को रूकवाने व तीन चार वर्षों से बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेन को चालू कराने के लिए समय-समय पर नगीना रेलवे स्टेशन पर निरीक्षण करने आए भारतीय रेल मंत्री,जीएम रेलवे दिल्ली, मंडल रेल प्रबंधक को प्रार्थना पत्र देकर मांग कर चुके हैं। लेकिन निरीक्षण करने आए सभी माननीयों द्वारा प्रार्थना पत्र लिए और आश्वासन देकर नगीना की जनता द्वारा दिए प्रार्थना पत्रों को रद्दी की टोकरी में डाल कर भूल गए।
जबकि कांठ, स्योहारा, धामपुर, नजीबाबाद जैसे रेलवे स्टेशन पर नाॅन स्टोप ट्रेनों में से एक एक दो दो ट्रेनों के स्टोपिज किए जाने की जानकारी मिली है।
बताया जाता वर्तमान सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद भी संसद सत्र में बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेन को चलवाने व नगीना रेलवे स्टेशन पर नाॅन स्टोप ट्रेनों में से एक दो ट्रेनों के स्टोपिज कराने की आवाज उठा चुके हैं। लेकिन उनकी आवाज़ को भी अनसुना कर दिया गया है।
नगीना की जनता का कहना है कि यदि नगीना लोकसभा व विधानसभा में भाजपा का सांसद विधायक होता तो उसके द्वारा उठाई जाने वाली आवाज़ से नगीना रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का स्टोपिज हो सकता था।
उधर क्षेत्र के लोगों का यह भी कहना है कि नगीना में बन रहे नवनिर्माण रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को तभी लाभ मिलेगा जब यात्रियों की यात्रा के लिए नाॅन स्टोप ट्रेनों में से ट्रेनों के स्टोपिज व बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेन के चालू किया जाए वरना नहीं।
उधर जब से नगीना रेलवे स्टेशन पर नव निर्माण भवनों का निर्माण कार्य शुरू हुआ है। तब से ही प्लेटफार्म नंबर एक पर बनी जीआरपी की पुलिस चौकी टूट जाने पर जीआरपी पुलिस चौकी का स्टाफ भी भटक रहा है इधर-उधर। ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्री अपने समझ रहे असुरक्षित। गुन्डे मवाली रेलवे स्टेशन पर रात व दिन में घूमते हैं मस्त। जीआरपी पुलिस के उच्चाधिकारियों का यात्रियों की सुरक्षा का नहीं है कोई ध्यान।
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