लापता लोगों की तलाश में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्तराज्य अधिकारियों के ढीले रवैये पर जताई नाराजगी, प्रिंसिपल सेक्रेट्री होम से व्यक्तिगत हलफनामा तलब

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

लखनऊ। राज्य में लापता लोगों की तलाश को लेकर अधिकारियों की लापरवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश में इतनी सुस्ती क्यों बरती जा रही है और प्रशासन इस गंभीर विषय को हल्के में क्यों ले रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लापता व्यक्ति किसी के परिवार का सदस्य है, उसकी सुरक्षा और जीवन की जिम्मेदारी राज्य की होती है। ऐसे मामलों में देरी न केवल प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाती है बल्कि पीड़ित परिवारों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रिंसिपल सेक्रेट्री (गृह) से इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा (पर्सनल एफिडेविट) दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को यह बताना होगा कि अब तक लापता लोगों की खोज के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और आगे की कार्ययोजना क्या है।
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस महकमा और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई मामले वर्षों से लंबित पड़े हैं। कोर्ट ने कहा कि हर लापता व्यक्ति के परिवार को समय-समय पर जांच की प्रगति की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें न्याय की उम्मीद बनी रहे।
अगली सुनवाई की तारीख पर कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।

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