पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को चलती ट्रेन से जबरन उतारा गया; देवरिया FIR में हुई गिरफ्तारी

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

लखनऊ/नई दिल्ली/शाहजहांपुर, 10 दिसंबर 2025 भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए लगातार संघर्ष करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को आज सुबह लखनऊ से दिल्ली आते समय चलती ट्रेन से कथित तौर पर जबरदस्ती उतार लिया गया। यह घटना शाहजहांपुर के आसपास हुई, जिसने उनके परिवार और समर्थकों के बीच गंभीर चिंता और अफरा-तफरी पैदा कर दी।

उनकी पत्नी, वरिष्ठ अधिवक्ता नूतन ठाकुर, ने इस कार्रवाई को अपारदर्शी और रहस्यमय बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। लंबी अनिश्चितता के बाद, देर शाम लखनऊ पुलिस ने पुष्टि की कि यह गिरफ्तारी देवरिया में दर्ज एक पुराने मुकदमे के संबंध में की गई है।

# ट्रेन से अचानक और जबरन गिरफ्तारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमिताभ ठाकुर लखनऊ से दिल्ली के लिए ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। सुबह शाहजहांपुर के पास 10 से 15 लोगों के एक समूह ने उन्हें ट्रेन से उतार लिया। इस समूह ने अपनी पहचान या गिरफ्तारी का कारण बताने से इनकार कर दिया, जिससे पूरी प्रक्रिया में संदेह पैदा हुआ।

ट्रेन अधिकारियों से संपर्क साधने पर, मात्र इतनी ही जानकारी मिली कि गिरफ्तार करने वाले लोग 'सिविल पुलिस' से संबंधित थे और उनका रेलवे पुलिस से कोई वास्ता नहीं था। यह अनिश्चितता बनी रही कि उन्हें किस जिले की पुलिस ने पकड़ा है और किस मामले में ले जाया जा रहा है।

अमिताभ ठाकुर की पत्नी, नूतन ठाकुर, ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से तत्काल जानकारी साझा करते हुए अपने पति की सुरक्षा पर आशंका जताई और उनके समर्थकों से मदद की अपील की।

# देर शाम हुई गिरफ्तारी की पुष्टि और देवरिया FIR की पृष्ठभूमि

दिनभर की अनिश्चितता और तनाव के बाद, देर शाम लखनऊ के तालकटोरा थाने के प्रभारी ने नूतन ठाकुर को फोन पर आधिकारिक सूचना दी। उन्होंने बताया कि अमिताभ ठाकुर को कुछ माह पूर्व देवरिया में दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है और उन्हें देवरिया ले जाया जा रहा है।

# देवरिया एफआईआर की पृष्ठभूमि:
यह गिरफ्तारी देवरिया में दर्ज एक अपहरण और दुष्कर्म पीड़िता से जुड़े मामले की एफआईआर से जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर ने इस मामले में जांच अधिकारियों पर दबाव बनाने और पीड़िता को बयान बदलने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। इसी संबंध में पुलिस ने उन पर और नूतन ठाकुर पर कथित तौर पर दबाव डालने का मामला दर्ज किया था।

नूतन ठाकुर ने इस घटनाक्रम पर गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा: "देवरिया एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही पूरे मामले को रहस्य बनाकर रखा गया था। मैंने कई बार जांच अधिकारी (आईओ) के बारे में पता करने की कोशिश की ताकि हम अपना कानूनी पक्ष रख सकें, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई। और आज, उन्हें इस तरह जबरदस्ती और अलोकतांत्रिक तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया।"

यह भी जानकारी मिली है कि देवरिया की इस एफआईआर में अधिवक्ता नूतन ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया है।

# कानूनी और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया

अमिताभ ठाकुर, जो अपनी निर्भीक कार्यशैली और सत्ता के विरुद्ध खड़े होने के लिए जाने जाते हैं, की गिरफ्तारी ने कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके समर्थकों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, इसे कानून के शासन का उल्लंघन और प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है।

* पारदर्शिता का अभाव: आलोचकों का कहना है कि एक पूर्व आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी में जिस तरह से डी.के. बसु दिशानिर्देशों (गिरफ्तारी का कारण बताना, मेमो तैयार करना, परिजनों को तुरंत सूचित करना) का उल्लंघन किया गया है, वह पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
* उत्पीड़न का संदेह: देवरिया मामले की जांच को जानबूझ कर गुप्त रखने और अब अचानक गिरफ्तारी करने के तरीके से यह संदेह गहरा गया है कि यह कार्रवाई अमिताभ ठाकुर को उनके भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष के लिए चुप कराने की कोशिश हो सकती है।

अब नूतन ठाकुर और उनकी कानूनी टीम इस मामले में हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका सहित अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, ताकि गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी जा सके और अमिताभ ठाकुर को जल्द से जल्द न्यायालय के समक्ष पेश किया जा सके।

* अगला कदम: देवरिया पुलिस स्टेशन पहुंचने पर अमिताभ ठाकुर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। इस दौरान गिरफ्तारी के कारणों और एफआईआर की प्रकृति को सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।

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