प्रदेश में जवाबदेही का नया विमर्श: वकील, पुलिस और पत्रकार भी अब जनता के प्रति जवाबदेह

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

लखनऊ। लोकतंत्र में जवाबदेही सिर्फ नेताओं या नौकरशाहों की नहीं, बल्कि उन वर्गों की भी है जो सीधे जनता से जुड़े हैं पुलिस, वकील और पत्रकार। कानून और संविधान ने इन तीनों संस्थाओं के लिए भी शिकायत और जवाबदेही के ठोस तंत्र तय किए हैं। सवाल यह है कि जब इनमें से कोई मर्यादा से बाहर जाए, तो जनता कहां जाए?

पुलिस के खिलाफ शिकायत: प्रदेश में कई रास्ते खुले

अगर किसी पुलिसकर्मी ने शक्ति का दुरुपयोग किया, गलत एफआईआर लिखी या उत्पीड़न किया, तो नागरिक सीधे एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।
पुलिस शिकायत प्राधिकरण (PCA) लखनऊ में ऐसे मामलों की जांच करता है।
राज्य मानवाधिकार आयोग भी पुलिस अत्याचार की जांच का अधिकार रखता है।
प्रदेश पुलिस की जनसुनवाई पोर्टल और आईजीआरएस सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है, जिसका ट्रैक नंबर नागरिक के मोबाइल पर आता है।

वकीलों पर निगरानी: बार काउंसिल के पास है जवाबदेही

न्याय दिलाने वाले वकील अगर अपने मुवक्किल के साथ धोखा करते हैं, फीस लेकर मुकदमा छोड़ देते हैं या पेशेवर आचरण का उल्लंघन करते हैं, तो हर जिले में बार एसोसिएशन से लेकर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, प्रयागराज तक शिकायत की जा सकती है।
अनुशासन समिति जांच कर सकती है और दोषी पाए जाने पर वकील का लाइसेंस निलंबित कर सकती है।
गंभीर मामलों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) तक मामला भेजा जा सकता है।

पत्रकारों की मर्यादा और प्रेस काउंसिल की ताकत

पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं, लेकिन यदि कोई पत्रकार फर्जी खबरें फैलाता है, ब्लैकमेलिंग करता है या आचार संहिता तोड़ता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता खुला है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ऐसे मामलों की जांच कर सकती है।
न्यूज चैनलों के खिलाफ NBA और BCCC में शिकायत दर्ज की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर झूठी खबर फैलाने पर आईटी एक्ट की धारा 66D और आईपीसी की धारा 505 के तहत कार्रवाई संभव है।
जनता के पास अब और मजबूत हथियार
प्रदेश में अब नागरिकों के पास अपनी बात रखने के लिए कई मंच हैं।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076,
आईजीआरएस पोर्टल,
जिला जनसुनवाई केंद्र,
और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे एक्स (ट्विटर) पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा।
इन शिकायतों पर प्रशासनिक अधिकारी सीधे कार्रवाई की मॉनिटरिंग करते हैं।
लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में जवाबदेही की संस्कृति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। अब जनता केवल दर्शक नहीं, बल्कि सिस्टम की निगरानी करने वाली ताकत बन रही है। पुलिस, वकील और पत्रकार तीनों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में उनका हर कदम जनता की नजर में है, और जवाबदेही से ही व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सकता है।

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