नर्सों के लिए न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग सख्त



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

लखनऊ। नर्सिंग कर्मियों के शोषण पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी निजी अस्पतालों को अपनी नर्सों को न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन देना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए कम वेतन देने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
डॉ. पवन कुमार अरुण, स्वास्थ्य महानिदेशक, ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लखनऊ के डॉ. एन.बी. सिंह को आदेश दिया है कि जिले में सभी निजी अस्पतालों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए।

10 से 100 बेड वाले अस्पतालों पर लागू होगा नियम

निर्देशों के अनुसार, यह आदेश फिलहाल 10 से 100 बेड वाले निजी अस्पतालों पर लागू किया गया है। राजधानी लखनऊ में करीब 1000 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ कार्यरत हैं। अब इन सभी संस्थानों को नर्सों को न्यूनतम 20,000 रुपये प्रतिमाह वेतन देना अनिवार्य होगा।

कम वेतन देने वालों पर होगी कार्रवाई

अब तक कई निजी अस्पतालों में नर्सों को केवल 10 से 12 हजार रुपये वेतन पर 8 से 10 घंटे तक काम कराया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अस्पताल द्वारा आदेश का उल्लंघन किए जाने पर उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है या उस पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

सीएमओ ने भेजे नोटिस और मांगी रिपोर्ट

सीएमओ डॉ. एन.बी. सिंह ने सभी निजी अस्पतालों को ईमेल के जरिए निर्देश भेज दिए हैं। उनसे नर्सों को दिए जा रहे वेतन की जानकारी मांगी गई है। अस्पतालों को यह रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर जिला मुख्यालय पर जमा करनी होगी।
नर्सों के सम्मान का सवाल
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को नर्सों के हित में ऐतिहासिक माना जा रहा है। लंबे समय से निजी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ को कम वेतन और अधिक कार्यभार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अब उन्हें 8 से 10 घंटे की ड्यूटी के बदले सम्मानजनक वेतन मिलेगा।

 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था

नर्सों के वेतनमान को लेकर विभिन्न राज्यों में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि निजी अस्पतालों में कार्यरत नर्सों को सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों के समान या कम से कम मानक के अनुरूप वेतन दिया जाए, ताकि उनके साथ भेदभाव न हो। इसी दिशा में अब उत्तर प्रदेश में सख्त अमल शुरू हो गया है।

स्वास्थ्य विभाग का यह कदम नर्सों को आर्थिक और सामाजिक सम्मान देने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। अब उम्मीद है कि यह आदेश अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा, जिससे पूरे प्रदेश में नर्सिंग पेशे को नई पहचान और गरिमा मिलेगी।

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