*केंद्रीय बजट 2026-27: व्यापारियों के हाथ लगी निराशा, सरकार ने की अनदेखी - एम.ए. जीलानी**शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत* पीलीभीत : केंद्रीय बजट 2026-27: व्यापारियों के हाथ लगी निराशा, सरकार ने की अनदेखी - एम.ए. जीलानी पीलीभीत/उत्तर प्रदेश, 1 फरवरी 2026: उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश (पंजी.) ने आज माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर गहरी निराशा व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इस बजट में देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले व्यापारी समाज की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।जिला अध्यक्ष एम.ए. जीलानी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार से व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन किसी भी प्रमुख मांग को पूरा नहीं किया गया, जिससे व्यापारिक जगत में रोष और हताशा है। संगठन ने कई मैंगो को प्रमुखता से उठया था 1. जीएसटी (GST) की जटिलता: जीएसटी कानून में जेल, सजा और भारी जुर्माने के कड़े प्रावधानों को समाप्त नहीं किया गया, जो व्यापारियों के लिए मानसिक उत्पीड़न का कारण बने हुए हैं।2. ब्याज दरों में राहत नहीं: व्यापारियों और उद्योगपतियों के लोन व लिमिट पर लगने वाली बैंक ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की गई, जिससे व्यापार की लागत बढ़ रही सरकार द्वारा आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कमर्शियल और औद्योगिक संस्थानों को नियमित करने के लिए कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।4. रुका हुआ रिफंड (ITC): जीएसटी स्लैब कम किए जाने के बाद 10% व 7% टैक्स अंतर का जो पैसा जीएसटी आईटीसी पोर्टल पर जमा है, उसे वापस करने की कोई घोषणा नहीं की गई।5. स्थानीय करों की मार: मंडी समिति जैसे स्थानीय करों को समाप्त करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किए गए।श्री जीलानी ने अंत में कहा कि यह बजट जमीनी हकीकत से दूर है और इससे छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारियों को कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।
शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत*
पीलीभीत : केंद्रीय बजट 2026-27: व्यापारियों के हाथ लगी निराशा, सरकार ने की अनदेखी - एम.ए. जीलानी पीलीभीत/उत्तर प्रदेश, 1 फरवरी 2026: उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश (पंजी.) ने आज माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर गहरी निराशा व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इस बजट में देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले व्यापारी समाज की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
जिला अध्यक्ष एम.ए. जीलानी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार से व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन किसी भी प्रमुख मांग को पूरा नहीं किया गया, जिससे व्यापारिक जगत में रोष और हताशा है। संगठन ने कई मैंगो को प्रमुखता से उठया था 1. जीएसटी (GST) की जटिलता: जीएसटी कानून में जेल, सजा और भारी जुर्माने के कड़े प्रावधानों को समाप्त नहीं किया गया, जो व्यापारियों के लिए मानसिक उत्पीड़न का कारण बने हुए हैं।2. ब्याज दरों में राहत नहीं: व्यापारियों और उद्योगपतियों के लोन व लिमिट पर लगने वाली बैंक ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की गई, जिससे व्यापार की लागत बढ़ रही सरकार द्वारा आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कमर्शियल और औद्योगिक संस्थानों को नियमित करने के लिए कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।4. रुका हुआ रिफंड (ITC): जीएसटी स्लैब कम किए जाने के बाद 10% व 7% टैक्स अंतर का जो पैसा जीएसटी आईटीसी पोर्टल पर जमा है, उसे वापस करने की कोई घोषणा नहीं की गई।5. स्थानीय करों की मार: मंडी समिति जैसे स्थानीय करों को समाप्त करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किए गए।
श्री जीलानी ने अंत में कहा कि यह बजट जमीनी हकीकत से दूर है और इससे छोटे व मध्यम वर्ग के व्यापारियों को कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।
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