केंद्रीय बजट 2026–27: ‘विकसित भारत’ की दिशा में ठोस कदम-किसानों, व्यापारियों और आम जनता के लिए उम्मीदों भरा बजट


 लखनऊ से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट

लखनऊ के विशेषज्ञों ने कहा-यह बजट राहत, पारदर्शिता और तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ता कदम है

लखनऊ। देशभर में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर राजधानी लखनऊ में भी प्रतिक्रियाओं की बौछार देखने को मिली।
आम जनता से लेकर कारोबारी वर्ग तक सभी ने बजट को “विकसित भारत” के सपने को आगे बढ़ाने वाला बताया।
टैक्स में राहत, किसानों के लिए तकनीकी योजनाएं, MSME और निर्यातकों को प्रोत्साहन जैसे प्रावधानों ने इस बार के बजट को चर्चा का केंद्र बना दिया है।

 आम जनता को टैक्स में राहत

लखनऊ के चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए अजय सक्सेना ने कहा कि,
“सरकार ने टैक्स स्लैब में जो बदलाव किए हैं, उससे मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी। डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता पर जोर वित्तीय अनुशासन को मजबूत करेगा।”

 किसानों ने जताई उम्मीदें

मलिहाबाद के आम उत्पादक राजेश यादव ने कहा,
“स्मार्ट एग्रीकल्चर मिशन से हमें उम्मीद है कि तकनीक के जरिए फसल की पैदावार बढ़ेगी। ड्रोन सर्वे और डिजिटल सब्सिडी की सुविधा किसानों के लिए नई शुरुआत है।”

 व्यापारियों को भी राहत की उम्मीद

लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा,
“MSME सेक्टर को ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात की नई राह मिलना बहुत बड़ा कदम है। अब छोटे व्यापारी भी सीधे विदेशों में अपना उत्पाद बेच सकेंगे।”

 युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए अवसर

आईटी पार्क गोमती नगर के उद्यमी साकेत त्रिपाठी ने कहा,
“स्टार्टअप्स को टैक्स में छूट और इनोवेशन फंड की घोषणा से युवाओं को नया प्लेटफॉर्म मिलेगा। यह बजट नई सोच और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।”

 विशेषज्ञों की राय

लखनऊ विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना श्रीवास्तव ने कहा कि,
“यह बजट दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की दिशा में है। टैक्स कानूनों में नरमी और पारदर्शिता का संयोजन सरकार की संतुलित नीति को दर्शाता है।”

बेताब समाचार एक्सप्रेस, लखनऊ संस्करण के विश्लेषण के अनुसार 

केंद्रीय बजट 2026–27 आम नागरिकों की जीवनशैली में सुधार, रोजगार सृजन और तकनीकी सशक्तिकरण की ओर बढ़ता ठोस कदम है।
यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की ठोस रूपरेखा है।

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