सोलहवें वित्त आयोग के शहरी अनुदानों पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में पैनलिस्ट रही डॉ. आस्था*

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शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत* 

पीलीभीत के लिए गौरव का क्षण: राष्ट्रीय वेबिनार में पैनलिस्ट रहीं डॉ. आस्था अग्रवाल सोलहवाँ वित्त आयोग के क्रियान्वयन पर रखे विचार

पीलीभीत। शहर के लिए गर्व और सम्मान की बात है कि नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल ने सोलहवें वित्त आयोग के शहरी अनुदानों पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में पैनलिस्ट के रूप में प्रतिभाग करते हुए अपने विचार रखे। इस वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 800 से अधिक प्रतिभागी जुड़े, जबकि जनप्रतिनिधियों में से विशेष रूप से केवल डॉ. अग्रवाल का चयन किया गया।
वेबिनार का विषय “सोलहवें वित्त आयोग के शहरी अनुदानों को समझना: निहितार्थ, सुधार और कार्यान्वयन मार्ग” रहा। पैनल में केरल राज्य के पूर्व महापौर सहित अन्य शहरी प्रशासन विशेषज्ञों ने भाग लिया और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय सुदृढ़ता पर चर्चा की।
डॉ. आस्था अग्रवाल ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले वर्ष नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित चेयरमैन एवं मेयर सम्मेलन के दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि सोलहवें वित्त आयोग की ग्रांट में टाइड फंड की अपेक्षा अनटाइड फंड का हिस्सा बढ़ाया जाए, जिससे नगर निकाय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दे सकें।
वेबिनार में आयोग द्वारा शहरी स्थानीय निकायों के लिए की गई प्रमुख सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें अनुदान राशि में वृद्धि, स्थानीय निकायों की स्वयं की आय बढ़ाने, पारदर्शिता, प्रदर्शन-आधारित शर्तों तथा राज्य हस्तांतरण की प्रभावशीलता जैसे विषय शामिल रहे। साथ ही छोटे और मध्यम शहरों द्वारा इन निधियों के बेहतर नियोजन, प्रभावी उपयोग और क्रियान्वयन के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। नगरपालिका प्रशासन में जमीनी अनुभव रखने वाली डॉ. अग्रवाल ने छोटे शहरों की व्यावहारिक चुनौतियों, संसाधनों की कमी, क्षमता निर्माण तथा जवाबदेही को मजबूत करने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उल्लेखनीय है कि सोलहवें वित्त आयोग द्वारा शहरी स्थानीय निकायों के लिए लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है, जो शहरों के बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगा। राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर डॉ. आस्था अग्रवाल की भागीदारी को नगर पालिका परिषद सहित पूरे पीलीभीत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह शहर की बढ़ती प्रशासनिक पहचान और सक्रिय नेतृत्व को भी दर्शाता है।

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