जामा ऐ अनवर पब्लिक स्कूल में हरियाली और बेजुबान जानवरों पर दया के शीर्षक पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया

शाहिद खान संवाददाता पीलीभीत* 
कुरान, ऋग्वेंद, भगवत गीता में भी गाय को पूजनीय माना गया है- डा० बिलाल*
जामा ऐ अनवर पब्लिक स्कूल में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें हरियाली और बेजुबान जानवरों पर दया के शीर्षक पर मुख्य अतिथि फौरेस्ट रेंजर, वन्यजीव विशेषज्ञ श्री आरिफ जमाल खां ने सेमिनार में अपने वक्तव्य को रखा। उन्होनें कहा कि हर घर में बेजुबान जानवरों के लिये कुछ न कुछ खाने पीने का सामान रखना चाहिए, बेजुबान जानवर कहते कुछ नहीं है परन्तु उनको समझ पूरी होती है जिस तरह से हम अपने परिवार में सभी से मोहब्बत रखते है ठीक उसी प्रकार हमारा कर्तव्य है कि हम बेजुबान जानवरों से प्रेम करें।
सेमिनार में डॉ० बिलाल चिश्ती ने कहा कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब स्वयं जानवरों के प्रति बहुत दयालु थे, जिसे इस्लामिक परम्पराओं में उजागर किया गया है। गाय के दूध को शिफा बताया गया है और गौमांस को हानिकारक बताया गया है। इस्लाम में गाय को पवित्र "जीव" के रूप में नहीं बल्कि ईश्वर की एक महत्वपूर्ण और कीमती नेमत (उपहार / आर्शीवाद) के रूप में देखा जाता है। जिसकी रक्षा और देखभाल करना इंसान की जिम्मेदारी है।
गाय का दूध माँ के दूध का दूसरा ऑप्शन होता है, कुरान में सूरह अल-बकराह गायों का वर्णन है, कुरान का सबसे लम्बा अध्याय सूरह बकराह है। ऋग्वेद में गायो के दूध की प्रशंसा की गई है। भगवत गीता में गाय को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है।
प्रधानाचार्य डा० बुशरा ने सभी छात्र-छात्राओं से कहा जब आपका जन्म दिन हो, तब हर जन्म दिन पर घरो में या बाहर मैदानों में एक पौधा ज़रूर लगाये।

*तुम रहम करो फर्श बरी पर खुदा रहम करेगा अर्शे बरी पर ।।*

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