मजदूरों की गुलामी की चार श्रम संहिताएं -मुनेश त्यागी
केन्द्र सरकार द्वारा लाई गई 4 लेबर कोड्स के खिलाफ 12 फरवरी 2026 को भारत की 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियंस, किसान संगठन, नौजवान और छात्र संगठन महिला संगठन सब मिलकर राष्ट्रीय व्यापी हड़ताल करने जा रहे हैं। यहीं पर सवाल उठता है कि आखिर करोड़ों की संख्या में मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान और महिलाएं यह राष्ट्र व्यापी हड़ताल क्यों करने जा रहे हैं? और जब भारत में दुनिया के सबसे बेहतरीन श्रम कानून मौजूद थे तो सरकार को उनसे क्या परेशानी थी? और सरकार ने उन्हें लाने से पहले श्रम कानून के जानकार लोगों से, ट्रेड यूनियन नेताओं से और संसद में विपक्षी दलों से कोई सलाह मशविरा क्यों नहीं किया? सरकार ने मजदूरों से या उनकी दस केन्द्रीय यूनियनों से उनकी परेशानियां नहीं सुनीं, उनसे कोई सलाह नहीं ली गई? तो आखिर सरकार की क्या मजबूरी थी?
जब इन "फोर लेबर कोड्स" के कानूनों का अध्ययन करते हैं तो पूरी तरह से यह स्पष्ट हो जाता है कि केन्द्र सरकार सरकार ये कानून सिर्फ और सिर्फ देशी विदेशी कारपोरेट कम्पनियों के मालिकों के मुनाफे बढ़ाने के लिए लेकर आई हैं और मजदूरों को सुविधा देने के केवल बहाने बनाए जा रहे हैं और मजदूरों और आम जनता को केवल गुमराह कर लिया जा रहा है और सरकार द्वारा तरह-तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं और सरकार पूछे जा रहे सवालों का जवाब नहीं दे रही है।
मजदूर विरोधी इन फॉर लेबर कोड्स के खतरे इस प्रकार हैं,,,काम के घंटे 12 कर दिए जाएंगे, ,,,न्यूनतम वेतन, बोनस, ग्रेविटी और ओवर टाइम पर हमला, ,,पक्की नौकरियां खत्म,,,, ठेका कारण को बढ़ावा,,,, अस्थाई नौकरियों की बाढ़, ,,,,फिक्स टार्म लागू,,,,,, छटनी आसानी से की जाएगी,,,,, हड़ताल के अधिकार पर पाबंदी,,,,, यूनियन बनाने और उसे मान्यता प्रदान करने में बाधाएं,,,,, मजदूरों कीसामाजिक सुरक्षा कमजोर किया जा रहा है,,,,,ईएस आई, पी एफ की गारंटी नहीं है,,,, श्रम न्यायालयों में मनमानी नियुक्तियां की जाएगी,,,, सामूहिक सौदेबाजी का मजदूरों का अधिकार खत्म कर दिया गया है,,,, मजदूरों को मनचाहे रूप से नौकरी से निकाला जाएगा,,,,, 18000 से ज्यादा पाने वाला कर्मचारी,मजदूर नहीं होगा,,,,,अधिकारों की मांग करने पर मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा,,,, मालिक अपनी मनमानी पर उतर आएंगे और ,,,,श्रम कानून का पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा।
,,,,,किसानों को मिनिमम सपोर्ट प्राइस नहीं दिया जा रहा है,,,,,उनकी कर्ज माफी नहीं हो रही है, ,,,,,,खेती महंगी हो गई है,,,, उनकी आमदनी घट रही है,,,,,,कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाया जा रहा है,,,,,,किसानों को नुकसान किया जा रहा है,,,,,बिजली का निजीकरण किया जा रहा है,,,,,, मनरेगा को खत्म कर दिया गया है और
साम्राज्यवादी ताकतों की मनमानी हरकतों के सामने घुटने टेक दिए गए हैं।
इन कानूनों से सिर्फ और सिर्फ देश विदेश के बड़े कारपोरेट मालिकान को राहत मिलेगी, उनके मुनाफे बढ़ेंगे और किसानों मजदूरों के मजदूर बेटे बेटियों या आगामी पीढ़ियों पर बेरोजगारी, गरीबी, शोषण और मनमाने अन्याय की आफत आएगी।
यूपी में मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय को देखकर तो विश्वास ही नहीं होता। सरकार मजदूरों को न्याय देना ही नहीं चाहती। इसकी एक तस्वीर देखने लायक है,,,, उत्तर प्रदेश में 26 श्रम न्यायालय हैं, मगर 17 श्रम न्यायालयों में पिछले कई साल से न्यायाधीश नियुक्त नहीं किए जा रहे हैं, जिस कारण लाखों मजदूर वादकारियों को सरकार के मनमाने अन्याय का सामना करना पड़ रहा है और हालात इतने खराब हैं कि सरकार को अनेकों बार ज्ञापन देकर मांग और आंदोलन करने के बाद भी, सरकार सक्षम और श्रम कानूनों के जानकार न्यायाधीशों को, वर्षों से खाली पड़े श्रम न्यायालयों में नियुक्त करने को तैयार नहीं है।
इन सारे खतरों, अन्याय , शोषण और समस्याओं को लेकर अब समस्त देशवासियों की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है। अब मजदूरों, किसानों और नौजवानों की नौकरी मजदूरों की नौकरी पर हो रहे खतरों के मामले में मौन रूप धारण नहीं करके नहीं रहा जाता सकता।
इन सब आपातकालीन परिस्थितियों में देश के तमाम मजदूरों, किसानों छात्रों और नौजवानों को एकजुट होकर इनका विरोध करना चाहिए और 12 फरवरी को किये जा रहे भारत बंद में किसानों, मजदूरों, नौजवानों और महिला कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होना चाहिए और इन मजदूर विरोधी फॉर लेबर कोड्स और दूसरे किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने और समूल समाप्त करने की मांग करनी चाहिए और इस देशव्यापी आंदोलन का भरपूर समर्थन करना चाहिए और सरकार द्वारा अपनी और मजदूर किसानों की आगामी पीढ़ियों को गुलाम बनाने के सरकार के सोचे समझे अभियान का विरोध करने की सबसे बड़ी जरूरत।
इस देश विरोधी देशव्यापी फॉर लेबर कोड्स के खिलाफ खिलाफ चल रहे आंदोलन में मजदूर किसानों की मांगे इस प्रकार हैं,,,1.मजदूर विरोधी फोर लेबर कोड्स को रद्द करो, 2. प्रतिमाह 26000 न्यूनतम वेतन लागू करो, 3. ठेका प्रथा और निजीकरण की मुहिम को रद्द करो, 4. अस्थाई, कच्चे कर्मियों और स्कीम मजदूरों को स्थाई करो, 5. मनरेगा कानून को बहाल करो, 6. न्यूनतम पेंशन 10000 प्रति माह लागू करो, 7. सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण बंद करो, 8. पुरानी पेंशन स्कीम लागू करो, 9. सभी मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा कानून लागू करो, 10.किसानों की फसलों का वाजिब दाम दो, 11. समस्त भारतीयों को मुक्त शिक्षा, मुक्त स्वास्थ्य और सबको रोजगार और सबको स्थाई कम्पल्सरी नौकरी का प्रबंध करो, 12.समस्त श्रम न्यायालयों में श्रम कानून के जानकार न्यायाधीश नियुक्त करो, 13. सभी श्रम कार्यालयों में मुकदमों के अनुपात में एसिस्टैंट लेबर कमिश्नर, स्टैनों और कर्मचारी नियुक्त करो, 14. सभी महिला कर्मचारियों को मजदूर कर्मचारियों की तरह समान काम का समान वेतन नीतियां लागू करो।
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