रोज़ा सिर्फ प्यास का नहीं, सब्र और नेकी का इम्तिहान है, डॉ शेख़


रिपोर्ट-गुड्डू चौधरी 

देश में अमन चैन और भाईचारे के लिए दुआ, करें मुसलमान

वंचितसमाज इंसाफ पार्टी के कुल हिंद सदर डॉ शेख ने कहा कि रोज़ा इस्लाम में फ़र्ज़ है,यह महीना रमजान पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए रहमत,मगफिरत, ओर निजात का पैग़ाम लेकर आता है,यही वह मुकद्दस महीना है,जिस में अल्लाह ताला ने, इंसानियत की रहनुमाई के लिए कुरान मजीद नाजिल किया,कुरान में इरशाद होता है, ए ईमान वालो,तुम पर रोजे फ़र्ज़ किए गए है, ताकि तुम परहेजगार बनो ,उलमा ए इकराम के मुताबिक,रमजान का असल मकसद इंसान के अंदर तक्वा यानी ,अल्लाह का डर ,ओर गुनाहों से बचने का जज्बा पैदा करना है,रोजा महज भूखा, प्यासा रहने का नाम नहीं है,बल्कि अपनी निगाह ,जुबान,हाथ,ओर दिल को हर बुराई से रोकने का नाम है रोजा, हदीस शरीफ में आता है , कि जब रमजान का महीना शुरू होता हैं,तौ जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते है,ओर जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं,ओर शैतानों को कैद कर दिया जाता है, शरीयत के हिसाब से हर बालिग,समझदार,ओर कुदरत रखने वाले मुसलमान पर रमजान के रोजे फ़र्ज़ है,जब की बीमार ,,मुसाफिर ,हमला ओर दूध पिलाने वाली औरत को छूट दी गई है,लेकिन बाद में क़ज़ा रोजे रखना जरूरी है,रोजे के साथ, तरावीह की नमाज ,कुरान की तिलावत,सदका,जकात,की अदायगी जरूरी बताई गई है हर  मुसलमान को रोजो का एहतमाम करना चाहिए,ओर गुनाहों को छोड़ना चाहिए, बुराईयों से बचना चाहिए,डॉ शेख ने कहा कि मरीजों को अपने डॉ की देख रेख में रोजा रखना चाहिए,अपने पड़ोसी ओर गरीब लोगों को भी खयाल रखना चाहिए,रोजे के इफ्तार में तली भुनी चीजों से बचना चाहिए ओर फलों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए,

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