धरती पर किसी को न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दूंगा: CJI सूर्यकांत



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

NCERT की किताब में न्यायपालिका में करप्शन वाले चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराज़गी, CJI ने कहा-यह सोची-समझी चाल लगती है

नई दिल्ली।देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को एक सशक्त बयान देकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने कहा कि “धरती पर किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
CJI सूर्यकांत ने यह टिप्पणी तब की, जब यह मामला सामने आया कि NCERT की एक नई किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक अध्याय शामिल किया गया है। इस पर नाराज़गी जताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक संपादन त्रुटि नहीं बल्कि न्यायपालिका की साख को कमजोर करने की “सोची-समझी चाल” प्रतीत होती है।

CJI ने लिया स्वत: संज्ञान

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वे इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत इस बात की जांच करेगी कि ऐसी सामग्री किताब में कैसे और किसकी अनुमति से शामिल की गई।
उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति या संस्था न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
“न्यायपालिका देश की आत्मा है। अगर कोई संस्था इसे कमजोर करने की कोशिश करती है, तो यह राष्ट्र के खिलाफ अपराध है,”
 CJI सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश भारत।

विवादित चैप्टर पर बढ़ा विवाद

NCERT की नई संशोधित पाठ्यपुस्तक में एक अध्याय शामिल किया गया है जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबावों का उल्लेख किया गया है। अध्याय में यह भी कहा गया कि “कभी-कभी न्यायपालिका भी दबावों में निर्णय लेती है।”
इस कथन को लेकर कानूनी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना कदम” बताया और कहा कि यह छात्रों के मन में न्यायपालिका के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा करेगा।

CJI ने दी सख्त चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की आलोचना और उसे बदनाम करने में अंतर है।
उन्होंने कहा-
“हम रचनात्मक आलोचना का स्वागत करते हैं, लेकिन यदि कोई संस्था बच्चों को यह सिखाने लगे कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो यह न्याय के प्रति विश्वास खत्म करने की खतरनाक साज़िश है।”
सरकार और NCERT से जवाब तलब की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अदालत जल्द ही शिक्षा मंत्रालय और NCERT दोनों से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांग सकती है। कोर्ट यह जानना चाहेगी कि किताब में यह अध्याय किस आधार पर और किन विशेषज्ञों की सलाह से जोड़ा गया।
संभावना है कि इस पर आने वाले हफ्ते में औपचारिक सुनवाई तय की जाए।

न्यायपालिका की साख सर्वोपरि

CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में दोहराया कि न्यायपालिका देश के लोकतंत्र की रीढ़ है।
उन्होंने कहा-
“जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। कोई भी ताकत इस विश्वास को हिला नहीं सकती। न्यायपालिका जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।”

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