ब्रेकिंग न्यूज़ या ब्लैकमेलिंग? पत्रकारिता के बदलते मायने पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
लखनऊ। एक दौर था जब “ब्रेकिंग न्यूज़” का मतलब जनता के हित में किसी बड़े खुलासे से होता था-सच को उजागर करने का साहस, सत्ता से सवाल करने का हौसला। लेकिन आज मीडिया के कुछ हिस्सों ने इस शब्द की आत्मा को ही बदल दिया है। अब कई जगह “ब्रेकिंग न्यूज़” का अर्थ खबर नहीं, दबाव, सौदेबाज़ी और ब्लैकमेलिंग से जोड़कर देखा जाने लगा है।
सूत्रों के अनुसार, कई तथाकथित पत्रकार सोशल मीडिया चैनलों, यूट्यूब और ऑनलाइन पोर्टलों के सहारे Press Council of India की निर्धारित आचार संहिता का खुला उल्लंघन करते हुए व्यक्तिगत लाभ के लिए खबरों का दुरुपयोग कर रहे हैं। किसी अधिकारी, व्यापारी या जनप्रतिनिधि के खिलाफ बिना प्रमाण के “ब्रेकिंग न्यूज़” चला देना, फिर बाद में उसे हटाने के बदले धन की मांग करना-यह प्रवृत्ति अब चिंता का कारण बन चुकी है।
कानूनी दृष्टि से क्या कहता है प्रेस एक्ट
भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (धारा 499 से 502) के तहत इस प्रकार की ब्लैकमेलिंग को अपराध माना गया है।
Press Council Act की धारा 13(1) स्पष्ट करती है कि कोई भी पत्रकार या मीडिया संस्थान यदि सार्वजनिक हित से हटकर व्यक्तिगत लाभ के लिए खबरों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करता है, तो यह “पत्रकारिता की गरिमा के विपरीत आचरण” (Unethical Journalism) माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ Press Council of India अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
वास्तविक पत्रकारिता
बनाम दिखावटी पत्रकारिता
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन इस स्तंभ की मजबूती सत्य, निष्पक्षता और पारदर्शिता से होती है-न कि सनसनी से। असली पत्रकार वो है जो जनता की आवाज बने, न कि किसी की जेब का गुलाम।
आज जरूरत है कि समाज और मीडिया संस्थान मिलकर इस “ब्रेकिंग न्यूज़ की ब्लैकमेलिंग संस्कृति” के खिलाफ आवाज उठाएं।
सच्चे पत्रकारों को आगे आकर इस प्रवृत्ति से खुद को अलग करना होगा, ताकि जनता का भरोसा मीडिया पर बना रहे।
ब्रेकिंग न्यूज़ का अर्थ बदलने वालों को याद रखना चाहिए कि खबर बेची नहीं जाती-खबर दिखाई जाती है, ताकि समाज जाग सके।
“प्रेस एक्ट” केवल पत्रकारों को अधिकार नहीं देता, बल्कि ज़िम्मेदारी भी सौंपता है -सच बोलने की, बिना किसी दबाव या स्वार्थ के।
Comments
Post a Comment