आईवाईसी राष्ट्रीय अध्यक्ष की डिटेंशन एवं पुलिस की बढ़ती मनमानी के विरुद्ध,भारतीय युवा कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष Uday Bhanu Chib की मनमानी गिरफ़्तारी तथा पिछले कुछ दिनों से जारी दमनात्मक पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है।

 Report by:S.A Betab 
श्री उदय भानु चिब ने जांच में पहले ही शामिल होकर पूरा सहयोग दिया था। न तो वे फरार थे, न ही जांच से बच रहे थे। इसके बावजूद उनकी गिरफ़्तारी यह दर्शाती है कि गिरफ्तारी जांच की आवश्यकता नहीं, बल्कि दबाव और डर की रणनीति बन चुकी है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि धारा 41A CrPC के नोटिस गिरफ्तारी के बाद थमाए जा रहे हैं। यह उस कानूनी सुरक्षा का सीधा उल्लंघन है, जिसका उद्देश्य अनावश्यक गिरफ्तारी को रोकना है। कानून को प्रक्रिया के नाम पर औपचारिकता में बदल दिया गया है।
साथ ही, युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों के परिवारों को आधी रात में उठाया जा रहा है। माता-पिता को घंटों तक थानों में बैठाया जा रहा है, बिना स्पष्ट जानकारी और बिना विधिक आधार के। यह कार्रवाई जांच नहीं, बल्कि मानसिक दबाव और भय पैदा करने का प्रयास प्रतीत होती है।

 *हिमाचल सदन प्रकरण* 
एआई समिट से संबंधित गिरफ्तारियों के बाद, आईवाईसी लीगल डिपार्टमेंट के पदाधिकारी, राष्ट्रीय समन्वयक तथा एक महिला पदाधिकारी हिमाचल सदन में विधिक बैठक कर रहे थे।
तभी लगभग 25–30 दिल्ली पुलिस कर्मियों का दल अचानक परिसर में घुस आया—
बिना वारंट
बिना लिखित अनुमति
बिना प्रवेश के आधार बताए
बिना किसी महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति के
उन्होंने स्टाफ से पूछताछ की और उस कमरे में प्रवेश किया जहां विधिक बैठक चल रही थी। यह न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि वकीलों और पदाधिकारियों के संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप भी है।

 *उत्तर प्रदेश से हिरासत एवं स्पेशल सेल प्रकरण* 
पिछली रात कई युवाओं को Uttar Pradesh से उठाया गया।

परिजनों को बताया गया कि उन्हें स्पेशल सेल, डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली लाया जा रहा है। परंतु जब परिवार वहां पहुंचे, तो उन्हें दो घंटे से अधिक समय तक बिना किसी पुष्टि के इंतजार कराया गया। हिरासत की आधिकारिक जानकारी भी नहीं दी गई।
केवल आईवाईसी लीगल डिपार्टमेंट के हस्तक्षेप के बाद ही उनके ठिकाने की जानकारी दी गई।
किसी भी व्यक्ति की हिरासत की जानकारी देने में देरी या इंकार करना स्थापित कानूनी सिद्धांतों और गिरफ्तारी की पारदर्शिता के नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

 *आईवाईसी मुख्यालय के आसपास भारी तैनाती* 
आईवाईसी कार्यालय के आसपास लगभग 300 से अधिक दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए हैं।
शांतिपूर्ण और राजनीतिक प्रकृति के विरोध के बावजूद इस प्रकार की भारी तैनाती भय और घेराबंदी का वातावरण पैदा करती है। यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने से अधिक राजनीतिक दबाव का प्रदर्शन प्रतीत होता है।


 *IYC राष्ट्रीय महासचिव श्री शेष नारायण ओझा का वक्तव्य,* हमारे National President IYC 
ने जांच में पूरा सहयोग दिया है और उनके पास कुछ छिपाना को नहीं है। यदि युवाओं की आवाज़ उठाना अपराध माना जा रहा है, तो हम उसका सामना करने को तैयार हूं। लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता। संविधान हमें शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है, और हम उसे जारी रखेंगे।”

 *एडवोकेट रूपेश सिंह भदौरिया जी का वक्तव्य* , National President, IYC 
आईवाईसी लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष Roopesh Singh Bhadauria ने कहा—
 “यह जांच नहीं, बल्कि प्रक्रिया का सुनियोजित दुरुपयोग है। जांच में शामिल होने के बावजूद गिरफ्तारी, धारा 41A के नोटिस गिरफ्तारी के बाद देना, आधी रात को परिवारों को उठाना, हिरासत की जानकारी छिपाना और बिना वारंट विधिक बैठक में घुसना — यह सब दर्शाता है कि कानून को भय पैदा करने के उपकरण में बदला जा रहा है। विधि का शासन अनिवार्य है, विकल्प नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि हर अवैध कार्रवाई के विरुद्ध उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

 *निष्कर्ष* 
जांच में सहयोग के बावजूद गिरफ्तारी, परिवारों का उत्पीड़न, हिरासत की जानकारी में देरी, विधिक बैठकों में अवैध प्रवेश, तथा अत्यधिक पुलिस बल की तैनाती — यह सब मिलकर संवैधानिक अधिकारों के क्षरण का संकेत देते हैं।
लोकतंत्र में असहमति को अपराध नहीं बनाया जा सकता।

 *भारतीय युवा कांग्रेस मांग करती है—* 
1. श्री उदय भानु चिब की तत्काल रिहाई।
2. धारा 41A और गिरफ्तारी संबंधी सभी कानूनी दिशानिर्देशों का पालन।
3. हिमाचल सदन प्रकरण की स्वतंत्र जांच।
4. जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई।
5. परिवारों और विधिक प्रतिनिधियों के उत्पीड़न पर तुरंत रोक।

लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा — दृढ़ता और वैधानिकता के साथ।

धन्यवाद सहित: 
IYC मीडिया विभाग।

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