रमज़ान की रहमतों में नन्हे ख़ान की खिदमत-ए-खल्क़-वार्ड नंबर 24 की मस्जिदों में रोज़ा इफ़्तार और बिरयानी तक़सीम का सिलसिला जारी
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
बरेली रमज़ानुल मुबारक का महीना बरकतों रहमतों और मग़फिरत का महीना है। इसी पाक महीना-ए-रमज़ान में आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) भीम आर्मी से जिला पंचायत वार्ड नंबर 24 के संभावित प्रत्याशी नन्हे ख़ान ने एक मिसाली कदम उठाते हुए खिदमत-ए-खल्क़ का शानदार सिलसिला शुरू किया है
नन्हे ख़ान ने पहले रोज़े से ही अपने वार्ड की तमाम मस्जिदों में रोज़ा इफ़्तार का प्रोग्राम शुरू किया, जो आज 11वें रोज़े तक लगातार जारी है उन्होंने अपनी टीम के साथ करमपुर चौधरी, अटा कायस्थान, बिबियापुर, लटूरी, वीरपुर उर्फ़ कासमपुर, घुसा, पिपरिया, सुरक्षा, नऊआ नगला, गोपालपुर, खितौसा, नौगमा घाटमपुर, सफरी, मुड़िया चेतराम, इमामगंज समेत कई ग्राम पंचायतों की मस्जिदों में रोज़ेदारों के लिए इफ़्तार का इंतज़ाम किया
हर जगह नमाज़ियों और रोज़ेदारों को बिरयानी के पैकेट देकर रोज़ा इफ़्तार करवाया गया। वहीं, दूसरे दौर में नन्हे ख़ान और उनकी टीम ने वोहित, परधौली, केशोपुर, गोटिया, खटोला, फरीदपुर रामचरन और सुरला की गोटिया जैसी मस्जिदों में भी रोज़ा इफ़्तार और बिरयानी वितरण का सिलसिला जारी रखा
इस मौक़े पर नन्हे ख़ान ने बताया कि-
हमारा यह रोज़ा इफ़्तार और बिरयानी वितरण का कार्यक्रम पहले रोज़े से शुरू हुआ था जो इंशाअल्लाह आख़िरी रोज़े तक जारी रहेगा हमने अपने तमाम कार्यकर्ताओं की टीम बनाकर हर ग्राम पंचायत की मस्जिदों में यह आयोजन कराया है
ताकि कोई भी रोज़ेदार इफ़्तार से महरूम न रह जाए
उन्होंने आगे कहा कि
रमज़ान मुबारक सिर्फ़ इबादत का महीना नहीं
बल्कि इंसानियत की खिदमत का महीना भी है इसी जज़्बे के तहत हमने यह इफ़्तार कार्यक्रम शुरू किया है इंशाअल्लाह, यह सिलसिला आने वाले सालों में भी जारी रहेगा
ग्राम पंचायतों के लोगों ने नन्हे ख़ान की इस पहल की ख़ूब सराहना की। उन्होंने कहा कि-
किसी भी राजनीतिक दल के उम्मीदवार की तरफ़ से इस तरह का इफ़्तार आयोजन पहली बार देखने को मिला है अक्सर लोग रमज़ान में एक दिन अपने दफ़्तर या पार्टी कार्यालय में इफ़्तार करवा देते हैं मगर नन्हे ख़ान ने मस्जिदों में जाकर रोज़ेदारों के साथ बैठकर इफ़्तार किया- यह अपने आप में एक अनोखी और मिसाली पहल है
मक़ामियों ने कहा कि यह पहल आने वाले सालों में दूसरी ग्राम पंचायतों को भी इस तरह के नेक अमल की तरग़ीब देगी।
रमज़ान की इस रूहानी फिज़ा में नन्हे ख़ान की यह खिदमत न सिर्फ़ सियासत का एक नया पैग़ाम दे रही है, बल्कि रोज़ा, इफ़्तार और इंसानियत के मायनों को और गहराई से समझा रही है।
अल्लाह तआला इस नेक अमल को कुबूल फरमाए और सब के रोज़ों, नमाज़ों और सदक़ात को मक़बूल करे।
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