50वीं बार तरावीह में किया खत्मे कुरआन
Report By:Anita Devi
बहेड़ी ,शहर के मारूफ हाफिज अनवार अहमद कादरी ने रमजान में पढ़ी जाने वाली खास नमाज़ तरावीह में 50वीं बार कुरआन सुनाया जो आज 27 वीं रात में मुकम्मल हो गया। आपने यह तिलावत का सफर 1975 में शुरू किया जिसमें अपने मुख्तलिफ मुक़ामात पर कुरान रमज़ान में सुनाया। 25 बार मोती मस्जिद में, दो बार शीशगढ़, एक बार बरेली, छह बार बैंगलोर कर्नाटक, 16 बार बाजार वाली मस्जिद बहेड़ी में सुनाया। अपने दो बार शबीना में
भी अकेले पूरा कुरआन पढ़ा है। इस मौके पर मोती मस्जिद में एक शानदार प्रोग्राम जश्ने खत्मुल कुरआन मनाया गया जिसमें शहर के उलेमा और शोअरा ने उन्हें खिराजे तहसीन पेश किया। मौलाना राशिदुल कादरी इमाम शाहजी मस्जिद ने कुरआन की फजीलत और माहे रमजान के ताल्लुक से बयान किया। उन्होंने बताया कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि तुम में वह इंसान सबसे अच्छा है जो कुरआन सीखे और सिखाए। कुरआन रमज़ान में खुदा की तरफ से उतारा गया है इसलिए जैसा कुराने पाक है ऐसे ही यह महीना भी पाक है। मकनपुर सिलसिले के मुफ्ती काशिफ सईद ने हाफिज अनवार साहब की दीनी मिल्ली और सामाजी खिदमात पर रोशनी डाली और उन्होंने बताया कि हाफिज साहब खुद में एक अंजुमन है वह अकेले नहीं है उनकी खिदमात जहां सामाजी और मिल्ली हैं वहीं उन्होंने 50 बार रमजान में खत्मे कुरान करके दुनिया को बता दिया कि परों से नहीं हौसलों से उड़ा जाता है और यह आपने करके दिखा दिया है।
खानकाहे शेरिया के मौलाना साबिर मियां ने अपनी तकरीर में हाफिज अनवार साहब की खिदमात को हर हर मैदान में बताया खास तौर से खानकाहे शेरिया का मोअतमदे खास बताया। मौलाना कफील व मौलाना आकिब रजा ने भी तकरीरें की नाअतो मन्क़बत हाफिज कैफ, हाफिज तौसीफ और सैफ जाफरी ने पेश की । सर परस्ती खानकाहे शेरिया के नासिर मियां साहब ने की आखिर में लंगर और मिठाई तक्सीम हुई और नासिर मियां ने मुल्क व मिल्लत में अमनो चैन की दुआ की। इस मौके पर मौलाना फरहान मियां, जैनुल मियां, एजाज अहमद, पप्पू शेरी, मोहम्मद शोएब, सलीम शेरी, सभासद सलीम चंदा, तशकील मियां, ताहिर पप्पू शादाब SK, नेताजी पीर मोहम्मद, सैफ शेरी, शारिक हबीब, हाफिज अफसार, हाफिज बिलाल, हाफिज जलील, सलीक अहमद, कलीम शेरी, रजी़ शाहजी वगैरा मौजूद रहे।
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