17 रमज़ान हमें सब्र, ईमान और हक़ पर क़ायम रहने का पैग़ाम देता है-इंजीनियर अनीस अहमद ख़ान


रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी

समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा ग़ज़वा-ए-बद्र का दिन इंसाफ़, अदम तास्सुब और अल्लाह पर भरोसे की नुमायंदगी करता है

बरेली। समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष इंजीनियर अनीस अहमद ख़ान ने 17 रमज़ान की रूहानी अहमियत पर बात करते हुए कहा कि यह दिन इस्लामी तारीख़ का वह सुनहरा पन्ना है, जब हक़ की फ़ौज ने सब्र, ईमान और अल्लाह पर भरोसे के साथ बातिल पर ग़लबा पाया। उन्होंने कहा कि ग़ज़वा-ए-बद्र सिर्फ़ एक जंग नहीं थी, बल्कि इंसाफ़, हिम्मत और यक़ीन की जंग थी जो हमेशा के लिए इस्लाम की बुनियाद में दर्ज हो गई।
इंजीनियर अनीस अहमद ख़ान ने कहा कि 17 रमज़ान हमें ये पैग़ाम देता है कि जब इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा रखता है और सच्चाई के रास्ते पर चलता है, तो फ़तह उसी की होती है। उन्होंने कहा कि इसी तारीख़ को क़ुरआन-ए-करीम का नुज़ूल भी शुरू हुआ, जो पूरी इंसानियत के लिए रहनुमा है।
उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि इस दिन को सिर्फ़ याद करने तक महदूद न रखें, बल्कि इसकी रूहानी अहमियत को समझते हुए अपने अमल से इस्लामी तालीमात पर अमल करें-ताकि समाज में मोहब्बत, इंसाफ़ और अमन की फ़ज़ा क़ायम हो सके।
इंजीनियर अनीस अहमद ख़ान ने कहा कि रमज़ान का महीना रहमत, बरकत और मग़फिरत का है, और 17 रमज़ान उस ईमान की मिसाल है जिसने इंसाफ़ और इंसानियत की नींव को मज़बूत किया।

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