बड़े उद्योगों के आसपास प्रदूषण की कोई विशिष्ट जांच नहीं: पर्यावरण मंत्रालय का लोकसभा में जवाब



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

सांसद नीरज मौर्य ने बरेली–बदायूं क्षेत्र में भूजल प्रदूषण, कैंसर और किडनी रोगों के बढ़ते मामलों को लेकर उठाया सवाल

नई दिल्ली/बरेली। बरेली और बदायूं जिलों में उर्वरक संयंत्रों और रासायनिक उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्टों के कारण भूजल में बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोकसभा में गंभीर सवाल उठाया गया। इस मुद्दे को उठाते हुए सांसद नीरज मौर्य ने सरकार से पूछा कि क्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इफको जैसे बड़े औद्योगिक संयंत्रों के आसपास की मिट्टी और भूजल की विषाक्तता की कोई विशेष जांच कराई है।
सांसद मौर्य ने क्षेत्र में बढ़ रहे कैंसर और किडनी रोगों के मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार से यह भी पूछा कि क्या बरेली-बदायूं के प्रभावित इलाके को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्र घोषित करने पर विचार किया जा रहा है।
इस पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा दिए गए जवाब से चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। मंत्री ने लोकसभा में बताया कि सरकार के पास बड़े उद्योगों के ठीक आसपास के क्षेत्रों का कोई विशिष्ट डेटा उपलब्ध नहीं है। सरकार के अनुसार केंद्रीय भूजल बोर्ड क्षेत्रीय स्तर पर ही डेटा तैयार करता है और इफको जैसे बड़े औद्योगिक संयंत्रों के आसपास की मिट्टी और भूजल की अलग से कोई विशेष निगरानी नहीं की गई है।
सांसद नीरज मौर्य ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जहां एक ओर स्थानीय जनता प्रदूषण की मार झेल रही है, वहीं सरकार के पास औद्योगिक इकाइयों के पास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य और पानी की गुणवत्ता को लेकर कोई ठोस अध्ययन तक मौजूद नहीं है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर लगाए गए जुर्माने और प्रभावित लोगों को दिए गए मुआवजे की जानकारी क्या है। इस पर भी सरकार ने कोई स्पष्ट राशि साझा नहीं की।
सांसद मौर्य ने कहा कि केवल व्यापक सूचकांक यानी सीईपीआई (Comprehensive Environmental Pollution Index) के आधार पर स्थिति का आकलन करना पर्याप्त नहीं है। जब तक स्थानीय स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि संचयी पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन के बिना किसी क्षेत्र को प्रदूषित श्रेणी में न रखना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है, जबकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य संकट लगातार गहराता जा रहा है।
सांसद मौर्य ने मांग की कि क्षेत्रीय स्तर की सामान्य निगरानी के बजाय औद्योगिक क्लस्टरों के आसपास गहन जांच कराई जाए और वहां के भूजल, मिट्टी तथा स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराया जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिल सके।

Comments

Popular posts from this blog

जमा-ए-अनवर पब्लिक स्कूल में प्ले ग्रुप से कक्षा 8वीं तक का परीक्षा फल वितरण हुआ रिपोर्ट कार्ड देखकर बच्चों के खिल उठे चेहरे*

बरेली शहर सीट पर सपा के ‘एजुकेशन आइकन’ मोहम्मद कलीमुद्दीन की दमदार दावेदारी, हजारों छात्रों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाकर बनाई मजबूत पहचान

पुलिस ने उसके बाप व भाई का भी धारा 170 बी एन एस एस में चालान कर एसडीएम नगीना की न्यायालय में पेश किया गया। जहां से दोनों को जमानत नहीं मिलने पर बेकसूर बाप बेटे को जाना पड़ गया जेल।