लाखों डेटा सेट साझा, लेकिन निगरानी पर चुप सरकार: सांसद नीरज मौर्य
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
निजी कंपनियों को सरकारी डेटा उपलब्ध कराने पर उठे सवाल, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग तेज
बरेली/आंवला:
देश में सरकारी डेटा के व्यापक स्तर पर निजी तकनीकी प्लेटफॉर्मों के साथ साझा किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आंवला से सांसद नीरज मौर्य ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार की निगरानी और जवाबदेही प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
सांसद नीरज मौर्य द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लाखों सरकारी डेटा सेट साझा किए जा रहे हैं। इन प्लेटफॉर्मों में एआई कोश, ओपन गवर्नमेंट डेटा प्लेटफॉर्म और नेशनल डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जिनका उद्देश्य नवाचार, पारदर्शिता और बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण को बढ़ावा देना बताया गया है।
हालांकि, सांसद मौर्य ने इस व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करने में असफल रही है कि अब तक कितने मामलों में डेटा का दुरुपयोग हुआ, कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर तक निजी कंपनियों को दी जा रही पहुंच के संभावित जोखिमों का कोई ठोस आकलन सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब देश के नागरिकों का संवेदनशील डेटा बड़े पैमाने पर साझा किया जा रहा है, तब उसकी निगरानी, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
नीरज मौर्य ने मांग की कि डेटा दुरुपयोग से जुड़े सभी मामलों का एक केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार किया जाए और इस पर नियमित रूप से संसद के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि नागरिकों की गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।
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