स्टिंग के नाम पर उगाही: छोटे अस्पतालों और महिला डॉक्टरों को बनाया जा रहा निशाना



खुफिया कैमरे से वीडियो बनाकर धमकी, पैसा न देने पर खबर चलाने का आरोप

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी

लखनऊ। पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की आड़ में कुछ तथाकथित पत्रकारों द्वारा “स्टिंग ऑपरेशन” के नाम पर अवैध उगाही और धमकाने के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। खासतौर पर छोटे-छोटे निजी अस्पतालों और महिला डॉक्टरों को निशाना बनाकर खुफिया कैमरों से वीडियो बनाना, फिर उसे आधार बनाकर पैसे की मांग करना और पैसा न देने पर खबर प्रसारित करना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है।

गर्भपात से जुड़े मामलों को बनाया जा रहा टारगेट

सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में महिला पत्रकार गर्भपात से संबंधित जानकारी लेने के बहाने अस्पताल पहुंचती हैं और वहां मौजूद महिला डॉक्टर से बातचीत को गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड कर लेती हैं। इसके बाद वही वीडियो अस्पताल संचालक या डॉक्टर को भेजकर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। आरोप है कि यदि पैसे की मांग पूरी नहीं होती, तो उक्त वीडियो को खबर के रूप में प्रसारित कर दिया जाता है।

संविधान की आड़ में अपराध नहीं छुप सकता

विशेषज्ञों का कहना है कि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रेस को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूर प्राप्त है, लेकिन यह पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है। अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत इस पर उचित प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।
ऐसे में स्टिंग के नाम पर किसी को ब्लैकमेल करना या पैसे वसूलना पूरी तरह असंवैधानिक और गैरकानूनी है।

आईपीसी की कई 
धाराओं में बनता है गंभीर अपराध

कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियां सीधे तौर पर कई आपराधिक धाराओं के अंतर्गत आती हैं—
धारा 384 IPC – जबरन वसूली
धारा 385 IPC – डराकर वसूली की कोशिश
धारा 503 IPC – आपराधिक धमकी
धारा 499 IPC – मानहानि
यदि यह कार्य संगठित रूप से किया जा रहा हो, तो धारा 120B IPC के तहत साजिश का मामला भी बन सकता है।
मेडिकल कानूनों और निजता का भी उल्लंघन
गर्भपात से जुड़े मामलों में Medical Termination of Pregnancy Act के तहत गोपनीयता का विशेष प्रावधान है। बिना अनुमति गुप्त रिकॉर्डिंग करना और उसे सार्वजनिक करने की धमकी देना मरीज और डॉक्टर दोनों के “निजता के अधिकार” का उल्लंघन है।

प्रेस काउंसिल ने भी तय किए हैं स्पष्ट नियम

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्टिंग ऑपरेशन केवल जनहित में और पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। किसी को फंसाने या आर्थिक लाभ के लिए स्टिंग करना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
पीड़ितों से शिकायत दर्ज कराने की अपील
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई अस्पताल संचालक या डॉक्टर इस तरह की उगाही या धमकी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
प्रशासन से भी मांग की जा रही है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर पत्रकारिता की साख को बचाया जाए।

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