एतक़ाफ़ इंसान को अल्लाह के करीब करने और आत्मशुद्धि का बेहतरीन जरिया: डॉ. मोहम्मद ख़ालिक अंसारी



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी

रमज़ान के आख़िरी दस दिनों में इबादत, तौबा और दुआ का खास मौका देता है एतक़ाफ़

बरेली। मायरा हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद ख़ालिक अंसारी ने कहा कि इस्लाम में एतक़ाफ़ एक बहुत ही अहम और रूहानी इबादत है, जो इंसान को अल्लाह के करीब करने का जरिया बनती है। उन्होंने बताया कि खास तौर पर रमज़ान के आख़िरी दस दिनों में मुसलमान मस्जिदों में बैठकर एतक़ाफ़ करते हैं और अपना अधिकतर समय नमाज़, कुरआन की तिलावत, ज़िक्र और दुआ में गुजारते हैं।
डॉ. अंसारी ने कहा कि एतक़ाफ़ का असली मकसद यह है कि इंसान कुछ समय के लिए दुनियावी व्यस्तताओं से अलग होकर अपने रब की इबादत में लग जाए और अपने गुनाहों से सच्चे दिल से तौबा करे। उन्होंने बताया कि रमज़ान के आख़िरी अशरे में शबे क़द्र की भी तलाश की जाती है, जो हजार महीनों से बेहतर रात मानी जाती है, इसलिए इन दिनों की इबादत का ख़ास महत्व है।
उन्होंने आगे कहा कि इस्लामी नजरिए से एतक़ाफ़ करने वाला शख्स बालिग, समझदार और शरीयत के अहकाम को समझने वाला होना चाहिए, ताकि वह एतक़ाफ़ के दौरान इबादत और उसके नियमों को सही तरीके से निभा सके। हालांकि छोटे बच्चों को भी मस्जिद और इबादत से जोड़ने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जा सकता है।
डॉ. मोहम्मद ख़ालिक अंसारी ने कहा कि अगर मुसलमान रमज़ान के इन मुबारक दिनों की अहमियत समझते हुए इबादत, तौबा और नेक कामों पर ध्यान दें, तो इससे न सिर्फ उनकी रूहानी जिंदगी बेहतर होगी बल्कि समाज में भी मोहब्बत, भाईचारा और इंसानियत का पैगाम मजबूत होगा।

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