कायस्थ समीकरण और साफ-सुथरी छवि के सहारे सपा के मजबूत दावेदार बने संजीव कुमार सक्सेना, कैंट व शहर सीट पर बढ़ी सियासी हलचल


38 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव, दशकों की समाजसेवा और कायस्थ समाज में मजबूत पकड़ -124 शहर व 125 कैंट सीट पर सपा के लिए बन सकते हैं ‘तुरुप का इक्का’

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

बरेली।
बरेली की सियासत में इन दिनों समाजवादी पार्टी के संभावित प्रत्याशी के रूप में उभर रहे संजीव कुमार सक्सेना का नाम तेजी से चर्चा में है। 125 कैंट विधानसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश कर चुके संजीव सक्सेना न केवल प्रशासनिक अनुभव बल्कि मजबूत सामाजिक आधार और साफ-सुथरी छवि के चलते सपा के लिए अहम चेहरा बनते दिख रहे हैं।

प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक मजबूती

संजीव कुमार सक्सेना ने उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम में लगभग 38 वर्षों तक सेवाएं दीं और नवंबर 2019 में क्षेत्रीय प्रबंधक (उप प्रबंधक वित्त) पद से सेवानिवृत्त हुए।
उन्होंने रोहिलखंड विश्वविद्यालय से बीकॉम और बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ की डिग्री हासिल की, जो उनके प्रशासनिक और विधिक ज्ञान को और मजबूत बनाती है।

देशभक्ति की विरासत वाला परिवार

संजीव सक्सेना ऐसे परिवार से आते हैं, जहां देशसेवा की गहरी परंपरा रही है। उनके दादा स्वर्गीय बाबूराम सक्सेना और दादी स्वर्गीय कृपा देवी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे, जिन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी द्वारा ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया था।
सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन को उनके परिवार ने यह कहकर ठुकरा दिया कि यह राशि किसी जरूरतमंद को दी जाए यह सोच आज भी उनके व्यक्तित्व में झलकती है।

30 वर्षों की सक्रिय समाजसेवा

संजीव कुमार सक्सेना पिछले तीन दशकों से समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
गरीब व जरूरतमंद परिवारों को विवाह व अन्य सामाजिक कार्यों में आर्थिक सहायता
नवरात्र, रामनवमी जैसे अवसरों पर भंडारा व भोजन वितरण
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को भोजन पैकेट
सर्दियों में जरूरतमंदों को कंबल वितरण
ऑक्सीजन सिलेंडर, PPE किट, मास्क व सैनिटाइजर का वितरण
टीकाकरण जागरूकता अभियान व रक्तदान शिविर
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य, उत्तराखंड दौरा, कारगिल शहीद कोष में योगदान और पर्यावरण संरक्षण अभियानों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

संगठनात्मक पकड़ और सामाजिक प्रभाव

संजीव कुमार सक्सेना की पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता के रूप में भी है।
पूर्व जिला उपाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी बरेली
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
सदस्य, रोटरी क्लब सेंट्रल बरेली
सक्रिय सदस्य, अमर उजाला फाउंडेशन
इसके साथ ही “हम कायस्थ” संगठन के संस्थापक सदस्य के रूप में उन्होंने समाज को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई।

कायस्थ वोट बैंक से बढ़ी सियासी ताकत

124 शहर विधानसभा क्षेत्र में जहां 65 हजार से अधिक कायस्थ मतदाता हैं, वहीं 125 कैंट क्षेत्र में भी करीब 25 हजार कायस्थ वोट निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं।
संजीव सक्सेना की इस समाज में मजबूत पकड़ और उनकी साफ-सुथरी छवि सपा के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकती है।

सपा के लिए ‘गेम चेंजर’ बन सकते हैं सक्सेना

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी संजीव कुमार सक्सेना पर दांव खेलती है, तो यह भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।
कायस्थ समाज में प्रभाव, लंबा प्रशासनिक अनुभव और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ इन तीनों का संयोजन उन्हें चुनावी मैदान में एक मजबूत दावेदार बनाता है।
साफ छवि, मजबूत सामाजिक आधार और सेवा की लंबी पारी के साथ संजीव कुमार सक्सेना बरेली की राजनीति में तेजी से उभरते हुए चेहरे हैं। 124 शहर और 125 कैंट विधानसभा सीट पर उनकी दावेदारी ने सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है, जिससे आने वाले चुनाव में मुकाबला और दिलचस्प होने की पूरी संभावना है।

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