सहारा सिटी हॉस्पिटल के एमडी माजिद रज़ा क़ादरी ने दी ईद-उल-फ़ितर की मुबारकबाद, बताया इसका असली मक़सद
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
रमज़ान की इबादतों के बाद खुशियों का दिन, अल्लाह का इनाम और बंदगी की कबूलियत की उम्मीद
बरेली। सहारा सिटी हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर माजिद रज़ा क़ादरी ने जनपद व क्षेत्रवासियों को ईद-उल-फ़ितर की दिली मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस्लाम में रमज़ान का महीना बेहद बरकतों और रहमतों वाला होता है। पूरे महीने मुसलमान रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं, अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और नेकियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
उन्होंने कहा कि 30 रोज़ों के पूरा होने के बाद ईद-उल-फ़ितर का त्योहार अल्लाह की तरफ से अपने बंदों के लिए इनाम के रूप में आता है। यह दिन सिर्फ खुशियां मनाने का नहीं बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करने का भी दिन है कि उसने हमें रोज़ा रखने और इबादत करने की तौफीक दी।
माजिद रज़ा क़ादरी ने बताया कि इस्लाम में ईद-उल-फ़ितर का बहुत ऊंचा मक़ाम है। यह त्योहार भाईचारे, मोहब्बत, बराबरी और इंसानियत का पैग़ाम देता है। इस दिन अमीर-गरीब का फर्क मिटाकर सभी लोग एक साथ खुशियां मनाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ईद से पहले सदक़ा-ए-फ़ितर अदा करना जरूरी है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। यह इस्लाम की खूबसूरती को दर्शाता है कि कोई भी व्यक्ति इस दिन मायूस न रहे।
ईद मनाने के सही तरीके पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ईद के दिन ग़ुस्ल करके साफ-सुथरे कपड़े पहनना, नमाज़ से पहले मीठा खाना, फ़ितरा अदा करना और ईदगाह या मस्जिद में जाकर नमाज़ अदा करना सुन्नत है। साथ ही रास्ते में तकबीर पढ़ना, नमाज़ के बाद एक-दूसरे को गले मिलकर मुबारकबाद देना और रिश्तों को मजबूत करना इस दिन की ख़ास पहचान है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि ईद के मौके पर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि हर व्यक्ति इस खुशी में शामिल हो सके। साथ ही अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों से मिलकर मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दें।
माजिद रज़ा क़ादरी ने कहा कि ईद-उल-फ़ितर सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि सब्र, इबादत और इंसानियत का इनाम है। यह हमें सिखाता है कि हम पूरी जिंदगी नेक रास्ते पर चलें और जरूरतमंदों का ख्याल रखें।
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