कायस्थ समाज पर सपा का दांव! क्या कैंट विधानसभा में बदलेगा समीकरण?
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
शहर के बाद अब कैंट में भी कायस्थ वोटों को साधने की तैयारी, भाजपा के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
बरेली जिले की 124 शहर विधानसभा के बाद अब 125 कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी (सपा) नए राजनीतिक समीकरण पर काम करती नज़र आ रही है। सपा की रणनीति इस बार कायस्थ समाज को अपने पक्ष में लामबंद करने की है।
कैंट क्षेत्र में हिंदू मतदाताओं के बीच कायस्थ समाज को सबसे संगठित और प्रभावशाली वर्ग माना जाता है। ऐसे में यदि सपा इस समाज से किसी मजबूत उम्मीदवार पर दांव लगाती है, तो भाजपा के लिए मुकाबला और मुश्किल हो सकता है।
कायस्थ वोट भाजपा का पारंपरिक आधार,
अब सपा की निगाहें
अब तक कायस्थ समाज को भाजपा का स्थायी समर्थक माना गया है। शहर और कैंट दोनों ही क्षेत्रों में इस समाज का वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सपा इस वर्ग से किसी लोकप्रिय चेहरे को टिकट देती है, तो भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
वैश्य बनाम कायस्थ- हिंदू समाज में प्रतिनिधित्व की जंग
कैंट विधानसभा सीट पर फिलहाल भाजपा का प्रतिनिधित्व वैश्य समाज के हाथों में है। पिछली बार भाजपा ने इसी वर्ग से प्रत्याशी उतारकर जीत दर्ज की थी।
अब अगर सपा कायस्थ प्रत्याशी मैदान में उतारती है, तो कैंट में सीधा मुकाबला वैश्य बनाम कायस्थ समाज के बीच देखा जा सकता है। यह मुकाबला केवल दो पार्टियों का नहीं बल्कि हिंदू समाज के दो प्रभावशाली वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जंग भी साबित हो सकता है।
सपा की नई रणनीति
गैर-यादव हिंदू समाज को साधना
सपा नेतृत्व अब अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण से आगे बढ़कर अन्य हिंदू जातियों को जोड़ने के प्रयास में है।
इस रणनीति के तहत कायस्थ समाज एक राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित समुदाय है, जो किसी भी क्षेत्र में चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
सपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई स्थानीय कायस्थ नेता हाल में संगठन स्तर पर सक्रिय हुए हैं और टिकट की दावेदारी पेश कर चुके हैं।
यदि सपा ने कायस्थ कार्ड खेला तो मुकाबला बराबरी का
राजनीतिक विश्लेषकों की राय में, कैंट क्षेत्र में लगभग 25 से 30 हज़ार कायस्थ मतदाता हैं, जो परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
यदि सपा इस वर्ग को टिकट देकर एकजुट करने में सफल रहती है, तो कैंट विधानसभा में मुकाबला भाजपा-सपा के बीच कांटे की टक्कर में बदल सकता है।
समीकरण यह भी संकेत देता है कि भाजपा यदि फिर से वैश्य प्रत्याशी पर भरोसा जताती है, तो कायस्थ समाज का झुकाव सपा की ओर जाना तय माना जा सकता है।
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