सदका-ए-फ़ित्र गरीबों की मदद और रोज़ों की मुकम्मलियत का जरिया : बाबू रज़ा
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
ईद की नमाज़ से पहले सदका-ए-फ़ित्र अदा करने की अपील
बरेली। ताजुश्शरिया हॉस्पिटल के डायरेक्टर बाबू रज़ा ने रमज़ान के पाक महीने के आख़िरी दिनों में मुसलमानों से सदका-ए-फ़ित्र अदा करने की ख़ास अपील की है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में सदका-ए-फ़ित्र की बड़ी अहमियत और फज़ीलत बयान की गई है। यह गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद का जरिया है, जिससे वे भी ईद की खुशियों में शरीक हो सकें।
बाबू रज़ा ने अपने बयान में कहा कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने फरमाया है कि सदका-ए-फ़ित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा किया जाए। अगर कोई व्यक्ति इसे अदा नहीं करता तो रोजेदार के रोजे आसमान और जमीन के बीच लटके रहते हैं, जब तक कि वह सदका-ए-फ़ित्र अदा न कर दे। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस फर्ज़ को वक्त रहते पूरा करे।
उन्होंने बताया कि सदका-ए-फ़ित्र हर उस मुसलमान पर वाजिब है जो साहिबे-निसाब हो। मालिके-निसाब मर्द पर यह जिम्मेदारी है कि वह अपना सदका-ए-फ़ित्र अदा करने के साथ-साथ अपने नाबालिग बच्चों का भी सदका-ए-फ़ित्र अदा करे। अगर बच्चों के वालिद मौजूद न हों तो यह जिम्मेदारी दादा पर आती है।
बाबू रज़ा ने कहा कि सदका-ए-फ़ित्र सिर्फ एक इबादत ही नहीं बल्कि समाज में बराबरी, हमदर्दी और भाईचारे को बढ़ाने का एक खूबसूरत जरिया है। इससे गरीब, जरूरतमंद और कमजोर तबके के लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो पाते हैं।
उन्होंने आखिर में तमाम मुसलमानों से अपील की कि ईद की नमाज़ से पहले अपने-अपने सदका-ए-फ़ित्र को अदा करें और ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक इसे पहुंचाने की कोशिश करें, ताकि रमज़ान के मुकद्दस महीने की बरकतें सब तक पहुंच सकें और ईद की खुशियां हर घर तक फैल सकें।
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