खानकाहे शेरिया बहेड़ी के सज्जादा नशीन मौलाना सूफी खालिद मियां शेरी का उर्से चेहल्लुम संपन्न
खानकाहे शेरिया बहेड़ी के सज्जादा नशीन मौलाना सूफी खालिद मियां शेरी का उर्से चेहल्लुम संपन्न
बहेड़ी ः रमजान से पहले 8 फरवरी को खानकाहे शेरिया बहेड़ी के सज्जादा नशीन ताजुल असफिया के पोते मौलाना खालिद मियां साहब का इंतकाल हो गया था। रमजान के महीने की वजह से बाद ईद उल फितर उनके चेहल्लुम की फातिहा का प्रोग्राम रखा गया था। ऐलान के मुताबिक 28 मार्च सुबह 9:00 से कुरान ख्वानी हुई 10:00 बजे से नाअतिया प्रोग्राम चला। दूर दराज से आए हुए अहले अकीदतो-मोहब्बत ने बारगाहे रिसालतो-विलायत में नजराना-ए-अक़ीदत पेश किया। काशीपुर से तशरीफ़ लाए मुफ्ती कासिमुल कादरी अशरफी ने खानकाहे शेरिया सिलसिला-ए-शेरिया की निस्बती हकीकत बयान की क्योंकि सिलसिल-ए-शेरिया कादरी भी है और नक्शबंदी भी है। अपने शाहे नक्शबंद क़स्र-ए-आरिफा की सवानह हयात बयान की और बताया कि हिंदुस्तान में यह सिलसिला इमाम ए रब्बानी शेख अहमद सरहिंदी से फैला, आज यह सिलसिला तमाम आलम-ए-इस्लाम में फैला हुआ है। इसके बनी सैयदना सिद्दीके अकबर हैं और यह तमाम सिलसिलों में सबसे ज्यादा जिक्रो-फिक्र इबादतो-रियाज़त और अखलाके नब्वी सिखाने वाला सिलसिला है। इसी सिलसिले को खानकाहे शेरिया के जद्दे आला पीलीभीत के शाहजी मोहम्मद शेर मियां ने रोहिलखंड में भटपुरा रामपुर से लाकर बढ़ाया और इसी सिलसिले की शाखें बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, पीलीभीत वगैरा यानी हिंदुस्तान और पड़ोसी मुल्कों में भी फैली हुई हैं और इसी सिलसिले से बेशुमार लोग जुड़े हुए हैं। हजरत नन्हे मियां, बन्ने मियां, व अच्छे मियां ने भी इसी सिलसिले की खूब खिदमत की और वही जिम्मेदारी खालिद मियां भी उठा रहे थे लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। 45 साल की उम्र में ही अपनी खिदमात देकर आलमे जावेदानी की तरफ कूच कर गए। मौलाना फरहान मियां, मौलाना साबिर मियां, मौलाना जियाउल मुस्तफा, मौलाना नसीम मिस्बाही, मौलाना राशिद उल कादरी ने भी खालिद मियां की खिदमात और खानकाहे शेरिया में उनके जरिए चलने वाले मदारिस-व-मसाजिद का जिक्र किया। प्रोग्राम की सदारत व सरपरस्ती पीलीभीत से तशरीफ़ लाए दरगाहे शाहजी के सज्जादा नशीन मुन्ने मियां शेरी साहब ने की और निजामत के फराइज़ मौलाना हाफिज अनवार अहमद शेरी ने अंजाम दिए। हजरत मुन्ने मियां ने खालिद मियां के भाई अलहाज निशात मियां को खानकाह की जानशीनी की पगड़ी बांधी और उनकी सज्जादगी का ऐलान किया। इस मौके पर अलहाज फरीद मियां, अलहाज प्यारे मियां, मोइन मियां, मौलवी अरशद मियां पीलीभीत, तस्लीम मियां मीरगंज, भटपुरा के जुनैद मियां, कैमरी के नज़ीर मियां, ताहिर मियां, जावेद मियां, सरताज मियां, नफीस मियां, नासिर मियां, सलीम शेरी, दानिश शेरी, रिजवान शेरी, सलीम अख्तर, सलीम चंदा, हाजी एजाज, तौफीक अहमद, मौलाना ताहिर, हाफिज कैफ, हाफिज तौसीफ, अजीम अनवर, फैजान नोमानी, हाफिज खलीक, हाफिज लईक शेरी, हाफिज नबी हसन, कारी शेर अली, मौलाना कफील, मोहम्मद शोएब, नवाज शेरी वगैरा व पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से मुरीद मौजूद रहे। कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। हजरत मुन्ने मियां ने मरहूम की मगफिरत और मुल्क में अमनो चैन की दुआ की। आखिर में तमाम हाजरीन को लंगरे शेरी पेश किया गया।
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