राशन व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा, सांसद नीरज मौर्य के सवाल से सामने आए हजारों अपात्र लाभार्थी



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

बरेली में 1,27,725 और बदायूं में 96,349 अपात्र चिन्हित, हजारों के राशन कार्ड निरस्त

बरेली/नई दिल्ली:
लोकसभा में उठाए गए एक सवाल के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ है। 
 नीरज मौर्य द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थी राशन का लाभ ले रहे थे, जिनकी पहचान कर उन्हें सूची से हटाने की कार्रवाई की गई है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से सदन में दिए गए जवाब के अनुसार, बरेली और बदायूं जनपद में बड़ी संख्या में फर्जी अथवा अपात्र राशन कार्डधारकों को चिन्हित किया गया है। जांच के दौरान बरेली में 1,27,725 और बदायूं में 96,349 अपात्र लाभार्थियों की पहचान की गई। इनमें से हजारों लोगों के राशन कार्ड निरस्त कर उन्हें सूची से बाहर भी कर दिया गया है।
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में प्रश्न पूछते हुए सरकार से जानकारी मांगी थी कि उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर सहित अन्य जिलों में अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता श्रेणी के अंतर्गत पंजीकृत राशन कार्डधारकों की संख्या कितनी है, उनमें से कितने अपात्र पाए गए हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी में जनप्रतिनिधियों की क्या भूमिका है और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि अंत्योदय अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत चल रही राशन व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, जिसमें अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उनके राशन कार्ड निरस्त किए जाते हैं। साथ ही पात्र परिवारों को योजना का लाभ सुनिश्चित कराने के लिए राज्य सरकारों को लगातार दिशा-निर्देश दिए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा में उठे इस सवाल के बाद राशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक पात्र गरीब परिवारों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

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