UCO बैंक की किस्मत बदलने वाली ऐतिहासिक कहानी-जब ईरान ने भारत को 14,000 करोड़ रुपये का "इंटरेस्ट गिफ्ट" दिया था
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
डॉ. मनमोहन सिंह और आयतुल्लाह अली खामेनेई की दोस्ती का वो सुनहरा दौर
2010 से 2012 के बीच भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक अनोखा चमत्कार हुआ था, जिसकी कहानी आज बहुत कम लोग जानते हैं। उस दौर में UCO बैंक गहरे संकट से गुजर रहा था। बैंक की आर्थिक हालत कमजोर थी और उसे अस्तित्व बचाने के लिए किसी बड़े सहारे की दरकार थी।
इसी बीच भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने न केवल UCO बैंक को दिवालिया होने से बचाया, बल्कि भारत और ईरान की दोस्ती को इतिहास में अमर कर दिया।
अमेरिकी प्रतिबंध और भारत का साहसिक निर्णय
वर्ष 2010-11 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। ईरान से तेल खरीदने और उसे भुगतान करने पर वैश्विक पाबंदी थी। परंतु भारत ने इस दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
डॉ. सिंह ने घोषणा की -भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ईरान से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा।
लेकिन बड़ा सवाल था -भुगतान कैसे किया जाए?
विदेशी बैंकों के ज़रिए भुगतान असंभव था, क्योंकि अमेरिका ने सभी रास्ते बंद कर दिए थे।
UCO बैंक बना भारत-ईरान लेनदेन का “एक्सक्लूसिव गेटवे”
डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने आर्थिक अनुभव और रणनीतिक समझ का परिचय देते हुए UCO बैंक को “ईरान के लिए एक्सक्लूसिव पेमेंट गेटवे” बनाने का निर्णय लिया। इसका मतलब था कि भारत द्वारा खरीदे गए तेल का भुगतान UCO बैंक में जमा किया जाएगा, परंतु यह पैसा अमेरिका की पाबंदी के कारण ईरान को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
ईरान का दिल छू लेने वाला फैसला
ईरान की सर्वोच्च नेतृत्व -आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनकी सरकार-ने इस व्यवस्था को सहमति दी। उन्होंने कहा,
“अगर हमारा पैसा भारत के विकास में काम आए, तो यह हमारी खुशकिस्मती होगी।”
इस फैसले ने एक नई मिसाल कायम की।
इंटरेस्ट-फ्री अकाउंट से मिली नई जान
भारत की रिफाइनरियाँ जब तेल खरीदती थीं, तो उसका भुगतान UCO बैंक में जमा होता गया।
यह रकम “इंटरेस्ट फ्री” थी-यानी उस पर कोई ब्याज नहीं देना था। बैंक के पास हजारों करोड़ रुपये जमा होते गए।
इस फंड को बैंक ने सुरक्षित निवेशों में लगाया। अनुमान है कि इस व्यवस्था से UCO बैंक को लगभग 14,000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ।
यह वह दौर था जब बैंक घाटे में चल रहा था, लेकिन ईरान की इस मित्रवत नीति ने उसे लाभदायक बना दिया। UCO बैंक के शेयर के भाव बढ़ने लगे और बैंक ने फिर से मजबूती हासिल की।
एक ऐतिहासिक मित्रता -जो आर्थिक नीति बन गई
यह केवल बैंकिंग व्यवस्था नहीं थी, बल्कि भारत-ईरान के बीच विश्वास और परस्पर सम्मान का प्रतीक थी। डॉ. मनमोहन सिंह की आर्थिक नीति और ईरान की उदार सोच ने एक ऐसा अध्याय लिखा, जो भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
आज के सियासी मौन पर सवाल
आज जब आयतुल्लाह अली खामेनेई इस दुनिया से विदा हो चुके हैं, तो यह सवाल उठता है कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक उनके प्रति श्रद्धांजलि तक क्यों नहीं दी?
क्या भारत उस ऐतिहासिक दोस्ती को भूल गया है, जिसने हमारी अर्थव्यवस्था को संकट से उबारा था?
अंतिम शब्द-दोस्ती जो कर्ज़ बन गई
भारत और ईरान के रिश्ते महज़ कूटनीति नहीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए कर्ज़ की तरह हैं
“दोनों मुल्क कभी भी डॉ. मनमोहन सिंह और आयतुल्लाह अली खामेनेई की मोहब्बत और भरोसे का कर्ज़ नहीं उतार सकते।”
ईरान को सलाम, भारत-ईरान दोस्ती जिंदाबाद,
जय हिंद
कृष्णन अय्यर, कांग्रेस
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