ईद मिलन समारोह के बहाने पसमांदा राजनीति को नई धार देने की तैयारी, 2027 चुनाव पर फोकस तेज


भारतीय पसमांदा मुस्लिम महासभा और संयुक्त पसमांदा मोर्चा के नेतृत्व में सामाजिक एकजुटता से राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति

 लखनऊ से निशा अरोड़ा की रिपोर्ट

लखनऊ ईद मिलन समारोह के अवसर पर यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम अब केवल सामाजिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पसमांदा समाज की राजनीतिक ताकत को संगठित करने का एक बड़ा मंच बनता दिखाई दे रहा है। भारतीय पसमांदा मुस्लिम महासभा के बैनर तले जारी हुए ईद मिलन समारोह में स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पसमांदा समाज अपनी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. मकसूद अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि पसमांदा समाज लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि समाज अपनी जनसंख्या के अनुपात में विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकायों में भागीदारी सुनिश्चित करे।

मकसूद अंसारी ने साफ कहा जो हमारी हिस्सेदारी की बात करेगा, वही हमारा नेतृत्व करेगा यह संदेश साफ तौर पर राजनीतिक दलों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
 
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट तौर पर सामने आया कि संयुक्त पसमांदा मोर्चा के साथ सहमति बन चुकी है और संगठन को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया गया है। यह गठजोड़ पसमांदा समाज की राजनीतिक ताकत को एकजुट करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एकजुटता आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है, ख़ासकर उन क्षेत्रों में जहां पसमांदा मतदाता निर्णायक संख्या में मौजूद हैं।
 वहीं 2027 चुनाव में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य निर्धारित करते 
हुए यह भी उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश की लगभग 15 प्रतिशत सीटों पर पसमांदा समाज का प्रभाव है। ऐसे में संगठन का लक्ष्य है कि इन सीटों पर अपने प्रतिनिधियों को चुनावी मैदान में उतारा जाए या फिर राजनीतिक दलों पर दबाव बनाकर उचित टिकट वितरण सुनिश्चित कराया जाए। पसमांदा समाज का सामाजिक आंदोलन से राजनीतिक शक्ति तक का सफर यह 
दर्शाता है की पसमांदा आंदोलन, जो अब तक सामाजिक न्याय और समान अधिकारों के लिए जाना जाता था, अब धीरे-धीरे राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है।
ईद मिलन जैसे आयोजनों के जरिए समाज के बुद्धिजीवियों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर एक मजबूत राजनीतिक रणनीति तैयार की जा रही है।
यही कारण है कि बड़ी संख्या में पसमांदा समाज की मौजूदगी, और कई प्रमुख राजनीति और सामाजिक चेहरों के 
अलावा कार्यक्रम में समाज के कई प्रमुख लोग और पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और गांव-गांव तक विस्तार करने का संकल्प लिया  जो बदलते राजनीतिक समीकरणों की आहट है
ईद मिलन समारोह के इस आयोजन ने साफ कर दिया है कि पसमांदा समाज अब केवल सामाजिक पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह राजनीतिक सत्ता में अपनी भागीदारी को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
अगर यह रणनीति जमीनी स्तर पर सफल होती है, तो 2027 के चुनाव में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण देखने को मिल सकता है। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से हाजी निसार अहमद, ताजुद्दीन अंसारी, हाजी परवेज अंसारी, मुस्तकीम मंसूरी, डॉ.मोहम्मद हलीम अज़हरी, मुनीर अल्वी, मोईन हाशमी, जमील अहमद, इकबाल भारती एडवोकेट, डॉ. अशरफ मंसूरी, इमरान अंसारी, सलीम अख्तर, इसहाक अंसारी, सोहेल अहमद, इरफान कुरैशी, आलमीन अंसारी, शमसुद्दीन, शफीक सिद्दीकी, आमिर साबरी, तैयब अंसारी, इरफान मंसूरी, अब्दुल करीम, हाजी सिराज, इश्तियाक अंसारी, जहांगीर कुरैशी, सालिम त्यागी, नसीम मनिहार, श्रीमती जुलैखा हाशमी, नईमा परवीन, हसीना खातून, इरफान कुरैशी, मुकीम इदरीसी सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही, कार्यक्रम के शामिल सलमानी समाज नेता इकबाल भारतीय एडवोकेट को भारतीय पसमांदा मुस्लिम महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद मकसूद अंसारी ने उत्तर प्रदेश में बड़े जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा करते हुए कहा की पसमांदा समाज की और से इकबाल भारती साहब को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उससे सलमानी समाज संगठित तौर पर भागीदारी हिस्सेदारी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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