पत्नी पर गंभीर आरोप: लाखों की मांग, जेवर और नकदी लेकर फरार, कोर्ट के आदेश पर दर्ज होगा परिवादवाराणसी कोर्ट ने दिए जांच के आदेश, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल



रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-7) ने एक गंभीर पारिवारिक विवाद मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 13 मई 2026 को पारित किया गया।
मामला प्रार्थी आशिष कुमार द्वारा दायर प्रार्थना पत्र से जुड़ा है, जिसमें उनकी पत्नी प्रियंका चौहान और उसके परिजनों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला प्रार्थी के अनुसार, उनका विवाह 3 जून 2015 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार प्रियंका चौहान के साथ हुआ था। शुरुआती समय में वैवाहिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया।
आरोप है कि पत्नी ने प्रार्थी और उसके परिवार के साथ विवाद करना शुरू कर दिया, गाली-गलौज और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां देने लगी।
झूठे मुकदमे और मारपीट का आरोप
प्रार्थी का कहना है कि पत्नी और उसके परिजनों ने उस पर और उसके परिवार पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए, जिनमें धारा 498A समेत अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं। इस दौरान मारपीट और घरेलू हिंसा के भी आरोप लगाए गए।
हालांकि, बाद में समाज के जिम्मेदार लोगों की मध्यस्थता से समझौता हुआ और पत्नी ने मुकदमा वापस ले लिया।

20 लाख रुपये की मांग का आरोप

समझौते के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। प्रार्थी के अनुसार, 29 अप्रैल 2024 को पंचायत के दौरान पत्नी ने शर्त रखी कि या तो उसे अलग मकान दिया जाए या फिर 20 लाख रुपये देकर संबंध समाप्त किया जाए।
नकदी और जेवर लेकर जाने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप 21 जुलाई 2025 की घटना से जुड़ा है। प्रार्थी के अनुसार, उस दिन पत्नी घर से करीब 60,000 रुपये नकद, सोने की सिकड़ी और अंगूठी लेकर चली गई।
इसके बाद प्रार्थी ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

प्रार्थी ने बताया कि उसने 22 जुलाई और 25 जुलाई 2025 को थाना चौबेपुर में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि पुलिस आयुक्त वाराणसी को स्पीड पोस्ट के जरिए शिकायत भेजी गई, 
फिर भी मामला अनसुना रहा।

उल्टा दर्ज हुआ मुकदमा

प्रार्थी का आरोप है कि पत्नी पक्ष ने 30 जुलाई 2025 को झूठी कहानी के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया, जिसमें कई गंभीर धाराएं लगाई गईं।

कोर्ट का आदेश
सभी तथ्यों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए आदेश दिया कि:
 प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में पंजीकृत किया जाए
 संबंधित धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई की जाए
न्याय की उम्मीद
इस आदेश के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी और प्रार्थी को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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