लखनऊ में एलपीजी संकट की आशंका के बीच बड़ा फैसला: अब पीएनजी उपभोक्ताओं को छोड़ना होगा गैस सिलेंडर



लखनऊ से रफी मंसूरी की रिपोर्ट 

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद यूपी में सख्ती, तीन महीने में एलपीजी कनेक्शन सरेंडर अनिवार्य-पीएनजी को बढ़ावा देने के निर्देश

लखनऊ में संभावित वैश्विक परिस्थितियों, खासकर ईरान से जुड़े युद्ध संकट की आशंका के बीच घरेलू गैस आपूर्ति को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 24 मार्च को जारी अधिसूचना के बाद उत्तर प्रदेश में खाद्य एवं रसद विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
राज्य के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कराना सुनिश्चित किया जाए। सरकार का मानना है कि संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पीएनजी का अधिकतम उपयोग जरूरी है।
नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ता पीएनजी और एलपीजी दोनों का एक साथ उपयोग नहीं कर सकेंगे। जिन इलाकों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क मौजूद है, वहां रहने वाले लोगों को अनिवार्य रूप से पीएनजी कनेक्शन लेना होगा। इसके लिए संबंधित कंपनियां उपभोक्ताओं को नोटिस भी भेज रही हैं।
खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, प्रदेश में पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है और इसकी आपूर्ति 24x7 जारी है। किसी भी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। यही वजह है कि सरकार इस विकल्प को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
प्रदेश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। रोजाना लगभग 2000 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में गैस आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाया जा सके।
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अधिसूचना लागू होने के तीन महीने के भीतर उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा, अन्यथा उनकी सप्लाई बंद की जा सकती है। इस कदम को ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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