स्टिंग के नाम पर ब्लैकमेलिंग: देवास से बरेली तक फैला उगाही का नेटवर्क उजागर
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
बरेली। मध्य प्रदेश के देवास की घटना ने खोली पोल, उत्तर प्रदेश के बरेली में भी सामने आ रहा समान पैटर्न
पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की आड़ में “स्टिंग ऑपरेशन” के नाम पर अवैध उगाही और धमकाने का संगठित खेल अब एक राज्य तक सीमित नहीं रह गया है। देवास में सामने आए ताज़ा मामले ने इस गंभीर प्रवृत्ति का खुलासा किया है, जिसका असर अब बरेली सहित अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है।
देवास (मध्य प्रदेश) की
घटना: फर्जी मरीज़
बनकर बनाया वीडियो, फिर ब्लैकमेल
मध्य प्रदेश के देवास में सामने आई घटना में आरोप है कि कुछ लोगों ने “स्टिंग ऑपरेशन” के नाम पर फर्जी मरीज बनाकर डॉक्टरों से बातचीत की और उसे गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया।
इसके बाद उसी वीडियो के आधार पर डॉक्टरों को धमकाकर लाखों रुपये की मांग की गई।
पुलिस कार्रवाई में इस मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें दो कथित मीडियाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ आरोपी अभी फरार हैं। जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
बरेली (उत्तर प्रदेश) में भी उभर रहा वही पैटर्न
इसी तरह का ट्रेंड अब बरेली में भी सामने आ रहा है, जहां छोटे निजी अस्पतालों और खासतौर पर महिला डॉक्टरों को निशाना बनाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार
महिला खुद को मरीज या पत्रकार बताकर अस्पताल पहुंचती है
गर्भपात (MTP) से जुड़े सवालों के बहाने बातचीत करती है
पूरी बातचीत को गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड किया जाता है
बाद में वीडियो दिखाकर पैसे की मांग और खबर चलाने की धमकी दी जाती है
संविधान की सीमा: स्वतंत्रता बनाम जिम्मेदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूर है, लेकिन यह असीमित नहीं है।
अनुच्छेद 19(2) के तहत इस पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाए गए हैं।
ऐसे में स्टिंग के नाम पर ब्लैकमेलिंग करना पूरी तरह गैरकानूनी और असंवैधानिक है।
आईपीसी की धाराओं में बनता है संगीन अपराध
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में निम्न धाराएं लागू हो सकती हैं
धारा 384 IPC जबरन वसूली
धारा 385 IPC डराकर वसूली का प्रयास
धारा 503 IPC आपराधिक धमकी
धारा 499 IPC मानहानि
धारा 120B IPC आपराधिक साजिश
मेडिकल कानून और निजता का उल्लंघन
गर्भपात से जुड़े मामलों में MTP Act के तहत गोपनीयता का विशेष प्रावधान है।
गुप्त कैमरे से रिकॉर्डिंग करना और उसे सार्वजनिक करने की धमकी देना “Right to Privacy” का सीधा उल्लंघन है।
प्रेस काउंसिल के नियम भी हुए नजरअंदाज
Press Council of India के अनुसार स्टिंग ऑपरेशन केवल जनहित में और पूरी जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।
किसी को फंसाने या आर्थिक लाभ के लिए स्टिंग करना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
सख्ती की जरूरत, पीड़ितों से आगे आने की अपील
देवास की घटना के बाद यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ एक शहर का मामला नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ संगठित अपराध मॉडल है।
ऐसे में विशेषज्ञों और प्रशासन की अपील
ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं
किसी भी दबाव में आकर पैसे न दें
कानून का सहारा लें।
पत्रकारिता की साख बचाने का वक्त
देवास (मध्य प्रदेश) की घटना ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है, जिसकी गूंज अब बरेली (उत्तर प्रदेश) तक सुनाई दे रही है।
जरूरत है सख्त कार्रवाई, जागरूकता और जिम्मेदार पत्रकारिता की, ताकि “स्टिंग” के नाम पर चल रहे इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
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