इंकलाब से मिले तो हमें जीतना आ गया

मुनेश त्यागी 

बचपन में चला करते थे  घुटनों  के  बल 
मां बाप के हाथ मिले तो चलना आ गया।
मुश्किलों के  खिलाफ  लड़े तो  थे  बहुत 
हारते  हारते   हमें   उभरना   आ   गया।

हकों के  लिए  मिलकर  लड़े  थे   बहुत 
लड़ते लड़ते ही  हमें  जूझना  आ  गया।
मेहनतकशों से जब मिलकर चलने लगे 
मुट्ठी भींच कर आवाज उठाना आ गया। 

अकेले-अकेले तो मजबूर थे चुप रहने को 
एकजुट  हुए  तो  हमें  बोलना  आ  गया।
जमाने की लूट ने हमें  रौंदा  था  तो  बहुत 
अपनों का मिला साथ तो भिडना आ गया।

उनकी सारी चालाकियां धरी की धरी रह गईं 
यह सब देखकर हमें भी  संभालना आ  गया
जुल्म ओ सितम ने हमें  कहां  उभरने  दिया 
मिला आपका साथ तो मुस्कुराना आ  गया।

उनकी कोशिशें थीं कि हिंदू मुसलमां खूब लड़ें 
मगर हमें तो और भी साथ  निभाना आ  गया।
इंकलाब   के   बारे  में   सुना  तो   था   बहुत 
इंकलाब से मिले  तो  हमें  जीतना  आ  गया।

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