नीट परीक्षा फेल सरकार फेल 256 लाख करोड़ का कर्जदार बेरोजगारी महंगाई अत्याचार भ्रष्टाचारियों की फौज कर रही मौज?*
मेरठ:-नीट परीक्षा फेल सरकार फेल 256 लाख करोड़ का कर्जदार बेरोजगारी महंगाई अत्याचार भ्रष्टाचारियों की फौज कर रही मौज?हिंदू राष्ट्र"आजाद नया भारत करीब 256 लाख करोड़ का कर्जदार बेरोजगारी महंगाई अत्याचार भ्रष्टाचारियों बलात्कारियों की फौज कर रही मौज?
बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजुद्दीन गादरे ने हिंदू राष्ट्र बनाने वाले षड्यंत्रकारियों से एक सवाल करते हुए कहा कि सबसे ज्यादा कुर्बानी देने वाला मुस्लिम समुदाय और भारत का पिछड़ी जाति अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति आदिवासी सिख ईसाई बौद्ध लिंगायत पारसी आदि सभी मूल निवासियों के महापुरुषों ने अनगिनत कुर्बानियां दी लेकिन कुछ षड्यंत्रकारी जिनके महापुरुषों ने माफी मांगकर और क्रांतिकारी साथियों की चुगली कर ब्रिटिश शासन प्रशासन से इनाम पाए वो आज भारत की सड़कों पर खुलेआम नंगे हथियार लहरा कर नंगा नाच करते हुए हिंदू मुस्लिम जो दिखाई दे रहे हैं। वह कौन से भारत के नागरिक हैं? देश का नौजवान सड़कों पर धक्के खा रहा है, मजदूर भूख से लड़ रहा है, किसान कर्ज़ में डूब रहा है, विद्यार्थी भविष्य की खोज में भटक रहा है, महिलाएँ डर भय के साये में जी रही हैं। कुछ षड्यंत्रकारी सत्ता के मंचों से “विकास” का ढोल पीट रहे है। मैं पूछना चाहता हूं यह कैसा विकास है? चारों ओर मजलूम लाचार जनता टूट रही है। सत्ता से जुड़े लोग अरबों की सम्पत्ति जोड़ रहे हैं?
प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर अब शिक्षा व्यवस्था संगठित भ्रष्टाचार का उद्योग बनते नजर आते हैं। करोड़ों युवाओं की मेहनत कुछ दलालों, अफसरों और सत्ता संरक्षित माफियाओं के हाथों नीलाम हो रही है। जिस देश में नौकरी योग्यता से नहीं, बल्कि लीक हुए पेपर और पैसों से तय होने लगे, वहाँ लोकतंत्र नहीं बल्कि अवसरों की लूट चल रही होती है। युवा वर्ग डिग्री लेकर बेरोज़गारी की कतार में खड़ा है। सरकार रोजगार के आंकड़ों का जादू दिखाती है, लेकिन ज़मीन पर पढ़ा-लिखा नौजवान पकौड़े तलने को मजबूर चाय की दुकान, डिलीवरी बॉय या अस्थायी ठेकों में अपना भविष्य खोजने को मजबूर है। चारों ओर जंगल राज आर्थिक संकट नही बल्कि एक पूरी पीढ़ी के आत्मविश्वास की हत्या है।
गाँवों में मनरेगा मजदूरों के लिए जीवनरेखा थी, लेकिन मजदूर को महीने भर में कुछ दिन भी काम नहीं मिलता। भूख, कर्ज़ और पलायन को मजबूर हैं। सैकड़ो सत्ता से जुड़े पूँजीपति हजारों करोड़ के कर्ज़ लेकर विदेश भाग जाते हैं और बैंक जनता के पैसों से उनकी भरपाई करते हैं।
"यानी मुनाफा निजी, नुकसान सार्वजनिक!"
यह वही खतरनाक व्यवस्था है जिसे दुनिया “Crony Capitalism” कहती है। आज सरकार जनता की नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों की मैनेजर बनती नजर आती है। नीतियाँ संसद में कम और उद्योगपतियों के बोर्डरूम में अधिक बनती दिखाई देती हैं।
महँगाई ने आम आदमी की कमर नहीं, पूरी ज़िंदगी तोड़ दी है।
रोजमर्रा की आमजन की जरूरत का रसोई गैस से लेकर दाल, तेल, दूध, दवाइयाँ और शिक्षा तक हर चीज़ आम नागरिक की पहुँच से दूर होती जा रही है।
सत्ता की लालची हर संभव प्रयास कर रही है। सत्ता धारी को जनता की थाली की चिंता नहीं, खुद की छवि चमकाने की है। भ्रष्टाचार का स्तर देखिए-अरबों रुपये के एक्सप्रेस-वे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद धंस जाते हैं। पुल गिर जाते हैं। सड़कें टूट जाती हैं। जनता करीब १४ तरह के टैक्स दे रही है। भ्रष्टाचारियों के महल बनवा रही है?
सबसे भयावह बात यह है कि देश में असमानता अब केवल आर्थिक नहीं रही; यह राजनीतिक और सामाजिक अन्याय का स्थायी ढांचा बनती जा रही है।
एक तरफ करोड़ों लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ सत्ता,अफसरशाही और उनके करीबी पूँजीपतियों की सम्पत्ति हर साल विस्फोटक गति से बढ़ रही है।
झूठा प्रचार “GDP बढ़ रही है”। गादरे जी ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि जीडीपी बढ़ने का मतलब यह है कि अमीर और अमीर होते जाएं, गरीब अपने बच्चों की फीस, दवा और भोजन के लिए तरसता रहे।
किसी भी देश की प्रगति का पैमाना शेयर बाजार नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की खुशहाली होती है।
साथियों देश आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। नीतियाँ जनता के लिए बनेंगी, लोकतंत्र धीरे-धीरे कुछ कॉर्पोरेट घरानों और राजनीतिक कुलीनों की जागीर बनकर रह गया है।
इतिहास गवाह है। जब जनता की पीड़ा अपनी सीमा पार करती है, तब सबसे शक्तिशाली सिंहासन भी हिल जाते है। तख्त बदल दो ताज बदल दो बेईमानों का राज बदल दो! 7827923402 सलाह मशवरा
राजुद्दीन गादरे
राष्ट्रीय प्रवक्ता
बहुजन मुक्ति पार्टी।
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