ईद उल अज़हा पर इंसानियत, कुर्बानी और भाईचारे का पैग़ाम
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
ताजुश्शरिया हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर क़य्यूम ख़ान उर्फ बाबू रज़ा ने दी मुबारकबाद
बरेली। ईद अल-अज़हा, जिसे आम बोलचाल में “बकरा ईद” कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक अहम और मुक़द्दस त्योहार है। यह त्योहार कुर्बानी, त्याग, इंसानियत और अल्लाह की राह में समर्पण का संदेश देता है। दुनिया भर के मुसलमान इस दिन नमाज़ अदा कर अल्लाह से अमन, तरक्की और भाईचारे की दुआ करते हैं।
इस खास मौके पर ताजुश्शरिया हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर क़य्यूम ख़ान उर्फ बाबू रज़ा ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को ईद उल अज़हा की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि यह त्योहार हमें त्याग, सब्र, मोहब्बत और इंसानियत का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। ईद उल अज़हा हमें यह सीख देती है कि इंसान को अपनी इच्छाओं और बुराइयों को छोड़कर समाज और इंसानियत की भलाई के लिए आगे आना चाहिए।
क़य्यूम ख़ान उर्फ बाबू रज़ा ने कहा कि आज समाज को नफ़रत नहीं बल्कि मोहब्बत, भाईचारे और एकता की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहार को सादगी, साफ-सफाई और आपसी सौहार्द के साथ मनाएं तथा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें।
उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं बल्कि इंसान के अंदर मौजूद घमंड, लालच और बुराइयों को खत्म करने का पैगाम है। ईद उल अज़हा समाज में बराबरी और इंसानियत को मजबूत करने का त्योहार है।
आख़िर में उन्होंने सभी लोगों की खुशहाली, सेहत और मुल्क में अमन-चैन की दुआ करते हुए कहा कि ईद का असली संदेश प्रेम, सेवा और इंसानियत है।
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