पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बैंच नहीं तो वोट नहीं
पश्चिमी उत्तर प्रदेश बैंच स्थापना संघर्ष समिति
वादकारियों को सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय देने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच स्थापना समिति की एक बहुत बड़ी मीटिंग की गई, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट बेंच स्थापना समिति के बहुत सारे बार संगठनों के पदाधिकारी ने हिस्सा लिया। मेरठ बार एसोसिएशन के वर्तमान नेतृत्व ने इस मरे हुए आंदोलन को फिर से जिंदा कर दिया है। आज की इस महत्वपूर्ण बैठक में अधिवक्ताओं ने भाग लिया और बेवकी से आंदोलन को मजबूती प्रदान करने के लिए अपने सुझाव दिए
इस बैठक का उद्घाटन इंडस्ट्रियल लॉ रिप्रेजेंटेटिव संगठन मेरठ के अध्यक्ष और ऑल इंडिया लायर्स यूनियन के कार्यकर्ता मुनेश त्यागी ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में मुनेश त्यागी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों वादकारी पिछले 78 सालों से सस्ते सुलभ और शीघ्र न्याय से वंचित हैं। इलाहाबाद जाने में हजारों रुपए खर्च होते हैं, अधिकांश गरीब वादकारियों के पास वहां जाने का पर्याप्त समय भी नहीं होता। वादकारियों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बैंच की स्थापना हेतु पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हजारों वकील पिछले 45-46 वर्षों से लगातार मांग करते आ रहे हैं और इस संघर्ष को बल प्रदान करने और ज़िंदा रखने के लिए हर शनिवार को न्यायिक काम का बहिष्कार भी करते आ रहे हैं मगर उत्तर प्रदेश की तमाम सरकारें पिछले 46 साल के इस जायज मांग की अनदेखी करती चली आ रही हैं। उन्होंने सिर्फ दिखावे के अलावा और कुछ भी नहीं किया।
हालात बता रहे हैं कि सस्ता और सुलभ न्याय केंद्र या राज्य सरकार के एजेंडे में नहीं है। उन्हें वादकारियों के साथ हो रहे निरंतर अन्याय से कुछ लेना-देना नहीं है। कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण आंकड़ों पर नजर डालनी जरूरी है,,,,
,,, विधि आयोग के फैसले के अनुसार 10 लाख जनसंख्या पर 50 जज होने चाहिए,
,,, देश भर में जिला न्यायाधीशों के लिए 25439 जज होने चाहिए जबकि 5000 से ज्यादा पद 20 30 साल से खाली पड़े हुए हैं,
,,,, देश में लंबित मुकदमों की संख्या इस प्रकार है,,, जिला आदतें 4, 81, 62,174 , ,,,हाई कोर्ट 63 लाख 62174 ,,,,सर्वोच्च न्यायालय 92320, लंबित मुकदमों की कुल संख्या 5, 52, 21, 848 है।
,,,,उच्च न्यायालयों में जजों की स्वीकृति संख्या 1122 है, जबकि इनमें से 300 पद खाली पड़े हुए हैं,
,,,,अंतर्राष्ट्रीय पैमाना,,,, 10 लाख जनसंख्या पर 107 जज होने चाहिए,
,,,,, विदेशों में जजों की स्थिति ,,,,,चीन में 10 लाख जनसंख्या पर 300 जज ,,,,, यूरोपियन देशों में 10 लाख जनसंख्या पर 220 जज और अमेरिका में 10 लाख जनसंख्या पर 150 जज नियुक्त किए गए हैं,
,,,,भारत में 10 लाख जनसंख्या पर मात्र 22 जज हैं
,,,,, और सबसे गज़ब का आंकड़ा देखिए,,,,उत्तर प्रदेश में 10 लाख जनसंख्या पर मात्र 18 जज कम कर रहे हैं।
मुनेश त्यागी ने बताया कि उपरोक्त आंकड़े बता रहे हैं कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार में स्वीकृत संख्या में जज नहीं है और यह स्थिति पिछले 10-15 साल से ज्यादा समय से बनी हुई है। लगातार मांग करने के बाद भी सरकार स्वीकृत संख्या के अनुसार जजों की नियुक्ति नहीं कर रही है और बेहद अफसोस की बात है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है और वह अपने संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और कृतव्यों के अनुसार वैधानिक कार्यों को पूरा नहीं कर रहा है।
मुनेश त्यागी ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की बेंच तुरंत स्थापित की जाए, विधि आयोग के फैसले के अनुसार 10 लाख जनसंख्या पर 50 जज तुरंत नियुक्त किए जाएं, मुकदमों के अनुपात में जज नियुक्त किए जाएं, मुकदमों के अनुपात में न्यायालयों का निर्माण किया जाए, जजों पर लाद दिये गए दिखावटी और मनमाने न्यायिक बोझ को कम किया जाए, मेरठ सहित उत्तर प्रदेश के 17 श्रम न्यायालयों में पिछले कई सालों से खाली पड़े पदों पर श्रम कानूनों के जानकार पीठासीन अधिकारियों को तुरंत नियुक्त किया जाए।
इन मांगों की समर्थन में मुनेश त्यागी ने अपने सुझाव दिए कि ,,,प्रत्येक शनिवार को सामूहिक भूख हड़ताल जोरदार तरीके से की जाए,,,, इस संघर्ष को सामूहिक संघर्ष में बदला जाए,,,,, इसमें किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों, महिलाओं और व्यापारियों को भी शामिल किया जाए ,,,,वादकारियों को संघर्ष में शामिल करके गांव-गांव, मोहल्ले मोहल्ले में पर्चे बांटे जाएं ,,,,एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को ज्ञापन दिए जाएं, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में रिट याचिकाएं दायर करके, पर्याप्त संख्या में जजों की नियुक्ति की मांग की जाए।
संघर्ष समिति की बैठक में विभिन्न जनपदों और बार एसोसिएशनों से आए अधिवक्ताओं के मुख्य सुझाव थे कि ,,,,शनिवार की हड़ताल को मजबूती से लागू किया जाए ,,,,एक संयुक्त आंदोलन शुरू किया जाए ,,,,,इस आंदोलन में किसानों मजदूरों छात्रों नौजवानों नेताओं सांसदों विधायकों को जोड़ा जाए ,,,,आंदोलन की कमियों को ढूंढा जाए ,,,,सरकार पर दबाव बनाया जाए ,,,,इस जनता की मांग को जनता के संघर्ष में बदला जाए, ,,,,वकीलों की पद यात्राएं निकाली जाएं, ,,,,इस संघर्ष को तेज किया जाए ,,,,बिना मजबूत और निरंतर संघर्ष के कुछ ना मिलेगा ,,,,बहरी गूंगी सरकार के कान खोले जाएं ,,,,,नेताओं, सांसदों और विधायकों को इस मांग के समर्थन में बोलने को मजबूर किया जाए ,,,,बैच की स्थापना तक मजबूत संघर्ष को जारी रखा जाए ,,,,,वकीलों और नेताओं को एकजुट और मजबूत किया जाए ,,,,सभी वकीलों को आंदोलन में शामिल किया जाए ,,,,,किसानों मजदूरों व्यापारियों को जोड़ा जाए ,,,,,आपसी फूट और बिखराव को रोका जाए ,,,,,एमएलए, एमपी का घेराव किया जाए ,,,,,,हर जिले में आंदोलन को मजबूत बनाया जाए ,,,,,जाति धर्म को दूर रखकर आंदोलन को बल प्रदान किया जाए ,,,,,,बैंच नहीं तो वोट नहीं का नारा मजबूती से जनता के बीच ले जाया जाए ,,,,बार काउंसिल में मजबूत नेता अधिवक्ताओं को चुना जाए ,,,,संघर्ष की निरंतरता कायम की जाए ,,,,इस आंदोलन में करो या मरो की भावना से पूरा करना होगा ,,,,जनता के सक्रिय नेताओं और सक्रिय वकीलों को जोड़ा जाए और सारी जनता को एकजुट किया जाए ,,,,,इस आंदोलन को एक जन आंदोलन का रूप दिया जाए और ,,,,,प्राइवेट बिल विधानसभा और संसद में पेश किए जाएं।
मीटिंग की अध्यक्षता अनुज शर्मा और संचालन परवेज आलम ने किया। संघर्ष समिति की इस बैठक में 20 बार एसोसिएशनों के अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें गाजियाबाद, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, मवाना, सरधना, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अलीगढ़, शामली, रामपुर, कैराना, मुरादाबाद, अलीगढ़, बुढ़ाना, मोदीनगर, गढ़मुक्तेश्वर, मेरठ बार एसोसिएशन, जिला बार एसोसिएशन और इंडस्ट्रियल लॉ रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन मेरठ के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर इस जरुरी आंदोलन को जोरदार दिशा और जीवन प्रदान किया।
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